Bhubaneswar News: ग्रीन हाइड्रोजन बस परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय मुद्दों का शीघ्र हो समाधान

Bhubaneswar News: आवास एवं शहरी विकास विभाग की एसीएस ने राज्य के पहले ग्रीन हाइड्रोजन परिवहन इकोसिस्टम की प्रगति की समीक्षा की.

Bhubaneswar News: स्वच्छ ऊर्जा और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए एक बैठक बुधवार को भुवनेश्वर स्थित खरबेल भवन के तृतीय तल स्थित सम्मेलन कक्ष में आयोजित की गयी. राज्य के आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) उषा पाढ़ी ने इसकी अध्यक्षता की.

परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर

बैठक में एनटीपीसी, ग्रिडको और कैपिटल रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (क्रूट) के बीच हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर होने के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गयी. उषा पाढ़ी ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना ओडिशा को अगली पीढ़ी के स्वच्छ परिवहन समाधानों को अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकती है. उन्होंने एक मजबूत और विस्तार योग्य हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो देशभर में सतत सार्वजनिक परिवहन का मॉडल बन सके. उन्होंने सभी संबद्ध एजेंसियों को तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय मुद्दों का शीघ्र समाधान करते हुए समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिये. साथ ही परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और दीर्घकालिक परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दिया. बैठक में क्रूट के प्रबंध निदेशक मोहम्मद सिद्दीक आलम, एनटीपीसी, ग्रिडको, आइपीआइसीओएल तथा आवास एवं शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

परिचालन व्यवस्था, मार्ग निर्धारण, वित्तीय व्यवहार्यता और जोखिम प्रबंधन पर हुई चर्चा

समीक्षा बैठक में परिचालन व्यवस्था, मार्ग निर्धारण, वित्तीय व्यवहार्यता, जोखिम प्रबंधन तथा विभिन्न एजेंसियों की जिम्मेदारियों पर विस्तृत चर्चा हुई. प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार एनटीपीसी हाइड्रोजन उत्पादन एवं आपूर्ति अवसंरचना का विकास और संचालन करेगी, ग्रिडको बिजली आपूर्ति और संबंधित सब्सिडी उपलब्ध करायेगी, जबकि क्रूट बस संचालन और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का प्रबंधन करेगा. बैठक में परियोजना के वित्तीय एवं परिचालन प्रभावों का भी व्यापक आकलन किया गया. क्रूट द्वारा परिचालन व्यय, राजस्व साझेदारी, सुनिश्चित किलोमीटर संचालन और जोखिम वितरण से संबंधित मुद्दों को उठाया गया, जिन पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. अधिकारियों ने माना कि यह परियोजना तकनीकी दृष्टि से एक अग्रणी पहल है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए संतुलित और व्यावहारिक ढांचे की आवश्यकता होगी. परियोजना के प्रारंभिक संचालन के लिए भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा-पुरी-कोणार्क कॉरिडोर को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया, जिससे परिचालन व्यवहार्यता सुनिश्चित होने के साथ-साथ हाइड्रोजन आधारित सार्वजनिक परिवहन की उपयोगिता का प्रभावी प्रदर्शन किया जा सके. बैठक में भूमि आवंटन, नियामकीय स्वीकृतियां, वायबिलिटी गैप फंडिंग तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गयी.

260 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन का प्रतिदिन होगा उत्पादन

परियोजना के तहत भुवनेश्वर स्थित क्रूट के पोखरीपुट डिपो में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन एवं रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की जायेगी. जिससे प्रतिदिन 260 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जायेगा. इसके साथ ही पायलट परियोजना के रूप में तीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है. ये बसें आदर्श परिस्थितियों में प्रतिदिन लगभग 600 किलोमीटर तक संचालित हो सकेंगी. यह पहल न केवल स्वच्छ और कुशल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध करायेगी, बल्कि टेलपाइप उत्सर्जन को समाप्त करते हुए प्रतिवर्ष लगभग 900 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायक होगी. परियोजना की कुल अनुमानित लागत 53.55 करोड़ रुपये है. इसमें से 19.52 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्वीकृत की गयी है. शेष राशि विभिन्न हितधारकों के योगदान तथा राज्य सरकार के सहयोगात्मक तंत्र के माध्यम से जुटायी जायेगी.

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