Sambalpur News: बामड़ा ब्लॉक में मनरेगा योजना का काम अधूरा, फिर भी हो गया पूरा भुगतान
Sambalpur News: सीडीओ के निर्देश पर विशेष टीम ने गोविंदपुर पंचायत में किया फील्ड निरीक्षण किया. इसमें मनरेगा योजना में कई अनियमितता का पता चला.
Sambalpur News: बामड़ा ब्लॉक की गोविंदपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत व्यापक अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि कई विकास कार्य पूर्ण हुए बिना ही लाखों रुपये की बिल का भुगतान कर दिया गया. इस मामले को लेकर स्थानीय क्षेत्र में चर्चा तेज हो गयी है तथा बामड़ा बीडीओ और संबंधित जीआरएस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
जिला परिषद चेयरमैन की बैठक में जीआरएस ने नहीं दिखाये कागजात
जानकारी के अनुसार, गोविंदपुर पंचायत में मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद संबलपुर जिला परिषद चेयरमैन कुमुदिनी नायक ने पांच दिन पूर्व बामड़ा ब्लॉक कार्यालय में समीक्षा बैठक बुलायी थी. बैठक के दौरान गोविंदपुर पंचायत में कार्यरत जीआरएस विनोद पाल से संबंधित कार्यों की फाइल एवं रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया. इसके बाद मामले की शिकायत जिला सीडीओ प्रसन्न पात्र को की गयी. सीडीओ के निर्देश पर गुरुवार को एक विशेष टीम ने गोविंदपुर पंचायत में मनरेगा कार्यों का फील्ड निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान वर्ष 2025-26 की कई परियोजनाओं में गंभीर अनियमितता पाये जाने की आशंका जतायी गयी. आरोपों के अनुसार, अमृत सरोवर योजना के तहत बामड़ा स्टेशन बस्ती तालाब के लिए 10 लाख रुपये, मुंडाढीपा तालाब के लिए 10 लाख रुपये तथा हरिपड़ा पंजाबी तालाब के लिए 10 लाख रुपये समेत अन्य छोटे-बड़े कार्यों को मिलाकर कुल 33.06 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है. जबकि निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर कार्य अधूरे या पूरी तरह से बंद पाये गये.
अभियंता के हस्ताक्षर के बिना भुगतान कैसे हुआ, इसकी जानकारी नहीं है : मुक्तेश्वर माझी
इस संबंध में पूछे जाने पर बामड़ा ब्लॉक के असिस्टेंट इंजीनियर मुक्तेश्वर माझी ने कहा कि संबंधित कार्यों के बिल किसी कनिष्ठ अभियंता या ब्लॉक कार्यपालक अभियंता द्वारा पास नहीं किये गये हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अभियंता के हस्ताक्षर के बिना भुगतान कैसे हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है. जिला परिषद चेयरमैन कुमुदिनी नायक ने इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने सवाल उठाया कि अभियंता की स्वीकृति के बिना सरकारी राशि का भुगतान कैसे किया गया. वहीं, बामड़ा बीडीओ पुष्पक प्रधान ने कहा कि बिना कार्य के भुगतान होने की जानकारी उन्हें है और आगे चलकर कार्य पूरा कराया जायेगा. बीडीओ के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में और अधिक संदेह पैदा हो गया है. लोगों का कहना है कि जब काम हुआ ही नहीं, तो पहले भुगतान क्यों किया गया और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की. स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि बीडीओ और संबंधित जीआरएस की कथित मिलीभगत के कारण ही इस प्रकार की अनियमितता संभव हुई. लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की जानकारी में लाखों रुपये की गड़बड़ी होने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
गोविंदपुर पंचायत में कार्यरत जीआरएस विनोद पाल पर पूर्व में भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं तथा उन्हें एक मामले में निलंबित किया गया था. इसके बावजूद उन्हें पुनः उसी पंचायत की अतिरिक्त जिम्मेदारी दिये जाने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.