Rourkela News: हर माह सर्पदंश के औसतन 17 मरीज पहुंच रहे राउरकेला सरकारी अस्पताल

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल में पिछले 41 माह में 719 सर्पदंश के मरीज इलाज कराने पहुंचे. इनमें अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों के हैं.

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल में 41 माह में सर्पदंश के 719 मरीज मरीज कराने पहुंचे. औसतन 17 मरीज हर माह इलाज कराने पहुंच रहे हैं. बारिश का मौसम आते ही गांव से लेकर शहर तक जहरीले सांपों का खौफ फैल गया है. लहुणीपाड़ा प्रखंड के कुर्डा स्थित हातिबहाल गांव की लक्ष्मी मुंडा (45) को रात में सोते समय सांप ने डस लिया. शुक्रवार को उसे गंभीर हालत में लहुणीपाड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसी तरह कुआरमुंडा पुटुरीखमन की नाबालिग बच्ची अनामिका टेटे (07) की सोते समय सांप के काटने से जान चली गयी थी. सुंदरगढ़ जिले के राउरकेला समेत आस-पास के क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है.

झाड़फूंक के चक्कर में जा रही जान

सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 3 साल 5 महीने (41 महीने में) राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) में सांप के काटने के 719 मरीज पहुंचे हैं. यानी हर महीने 17 लोगों को सांप काट रहे हैं. इनमें से कुछ की जान भी जा चुकी है. ऐसी घटनाएं इसलिए हो रही हैं, क्योंकि लोग बारिश के दौरान अपने घर और आसपास साफ-सफाई नहीं रखते. कुछ लोग सांप के काटने के मरीजों को ठीक करने के लिए जादू-टोना का सहारा ले रहे हैं. सर्पदंश के मरीजों को अस्पताल लाने में देरी के कारण उनकी मौत हो रही है.

2024 में 310 मरीज आरजीएच पहुंचे

आरजीएच से आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 201 लोग सर्पदंश का शिकार हुए. 2023 में 132 और 2024 में सर्वाधिक 310 लोग सर्पदंश के शिकार हुए और उन्हें आरजीएच में भर्ती कराया गया. इसी प्रकार जून, 2025 के दूसरे सप्ताह तक कुल 76 सर्पदंश के मरीज आरजीएच पहुंचे हैं. जनवरी 2025 में सिर्फ सर्पदंश के केवल दो मरीज आरजीएच में आये. फरवरी में 7, मार्च में 12, अप्रैल में 13, मई में 27 और जून के दूसरे सप्ताह तक सर्पदंश के 17 से अधिक मरीज आरजीएच आ चुके हैं. मई और अगस्त महीने में सबसे ज्यादा लोग सर्पदंश के शिकार होते हैं. आरजीएच में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि शहर से ज्यादा आसपास के इलाकों से लोग सर्पदंश का शिकार होने के बाद अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे हैं.

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Published by: Bipin kumar yadav

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