Sambalpur News: अनुगूल में लोगों के लिए खतरा बने एक दंतैल हाथी को तीन दिन पहले वन विभाग ने काबू किया था. बाद में उसे ट्रैंकुलाइज कर एक वाहन में लादा गया और तब से वन विभाग उसे लेकर एक से दूसरी वन रेंज में घूम रहा है. इस बीच करीब 60 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन इस हाथी के पुनर्वास को लेकर कोई व्यवस्था नहीं हो पाने से वन विभाग की चिंता बढ़ गयी है.
अब तक सात से अधिक रेंज में जाने के बाद भी नहीं किया जा सका है पुनर्वास
तीन जून को दोपहर 3:00 बजे से हाथी को लेकर वन विभाग की टीम जगह-जगह घूम रही है. तीन जून को हाथी को काबू करने के बाद वन विभाग ने उसे ट्रैंकुलाइज किया था. जिसके बाद हाथी को शिमलीपाल और करंजिया वनांचल भेजा गया. लेकिन वहां पर स्थानीय लोगों ने हाथी को रखने नहीं दिया. अब तक सात से अधिक रेंज में घूमने के बाद भी वन विभाग की टीम हाथी के पुनर्वास को लेकर निर्णय नहीं ले सकी है. लिहाजा वन विभाग का तनाव अब बढ़ गया है. हाथी को कहां छोड़ा जाये, इसे लेकर वन विभाग पूरी तरह से परेशान है. इस हाथी के हमले में पिछले एक माह में पांच लोगों की जान जा चुकी है. जिस कारण लोग इसे स्थानांतरित करने की मांग कर रहे थे. लोगों ने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया था.
गर्मी में बार-बार ट्रैंकुलाइज करना हाथी के लिए घातक : विशेषज्ञ
वन्यजीव विशेषज्ञ स्वप्नश्री षाड़ंगी बताती है कि हाथी 60 घंटे से अधिक समय से गाड़ी में है. इतनी भीषण गर्मी में उसे बार-बार ट्रैंकुलाइज किया जा रहा है. जिससे हाथी के लिए खतरा पैदा हो सकता है. हाथी को कहां छोड़ा जाना था, इसे लेकर विभाग को पहले ही तैयारी कर लेनी चाहिए थी. इसी तरह पर्यावरण व वन्यजीव प्रेमी प्रसन्न बेहेरा कहते हैं कि हाथी को पकड़ने से पहले उसे कहां छोड़ा जायेगा उसकी तैयारी कर लेनी चाहिए थी. इसके लिए अलग से एसओपी है. बड़े अधिकारी हों या फील्ड अधिकारी, सभी को पहले से योजना बनानी चाहिए थी. वन विभाग के इस रवैये ने गजराज के जीवन को खतरे में डाल दिया है. वहीं वन विभाग के अधिकारी भी इस पर किसी तरह की टिप्पणी करने से बच रहे हैं.
