Rourkela News: राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) की एक इकाई, इस्पात जनरल हॉस्पिटल (आइजीएच) के बर्न सेंटर ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया. इस अवसर पर बर्न केयर और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में 50 वर्षों की समर्पित सेवा को याद किया गया.
भारत की सर्वश्रेष्ठ बर्न यूनिट्स में से एक बनाने का होना चाहिए प्रयास
आरएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज आलोक वर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि बर्न यूनिट की सफलताओं पर खुशी व्यक्त की. कहा कि मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि बर्न यूनिट किस तरह के गंभीर मामलों को संभाल रही है. हालांकि, हमें हर दिन अपनी सेवाओं में सुधार करते रहना होगा. डीआइसी ने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि कई बड़े अस्पताल उच्च मृत्यु दर के कारण बर्न यूनिट बनाये रखना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन एक थर्मो-सेंसिटिव प्लांट होने के नाते, हमें न केवल इस यूनिट को बनाये रखना चाहिए, बल्कि भारत की सर्वश्रेष्ठ बर्न यूनिट्स में से एक बनने का भी प्रयास करना चाहिए. विशिष्ट अतिथि सीएमओ इंचार्ज (एमएंडएचएस) डॉ जेके आचार्य ने कहा कि यह यूनिट, जिसे आइजीएच के लिए एक आवश्यकता के रूप में शुरू किया गया था, अब ओडिशा के लोगों की आशा बन गयी है. उन्होंने पूरे राज्य में गंभीर रूप से जले हुए मरीजों के लिए जीवनरेखा के रूप में बर्न यूनिट की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला.
विभाग के संविदा और नियमित कर्मचारियों को किया सम्मानित
डॉ रूबी सिंह, कंसल्टेंट (बर्न और प्लास्टिक सर्जरी) ने 1976 में स्थापना के बाद से बर्न सेंटर की यात्रा पर एक ज्ञानवर्धक प्रस्तुति दी, जिसमें बर्न, प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के विभिन्न सफल मामलों पर प्रकाश डाला गया. डीआइसी ने मरीजों की देखभाल और संस्थान के विकास में उनके अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए विभाग के संविदा कर्मचारियों और नियमित कर्मचारियों को सम्मानित किया. इस अवसर पर एक ‘पेशेंट एजुकेशन मैनुअल’ (मरीज शिक्षा नियमावली) भी जारी किया गया. इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा बर्न यूनिट के इतिहास और विरासत पर आधारित एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया. डॉ पी श्रवण एस कुमार, मैनेजर (हॉस्पिटल एडमिन) ने सभा का स्वागत किया, जबकि डॉ सीमा लाकरा, एसीएमओ (एमएंडएचएस) ने कार्यक्रम का संचालन किया. डॉ जीएस साहू (सीनियर सुपरस्पेशलिस्ट-बर्न और प्लास्टिक सर्जरी) ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया. डॉ प्रतिभा षाड़ंगी समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और बड़ी संख्या में अस्पताल के कर्मचारी इस अवसर पर उपस्थित थे.
21 मार्च 1976 को रखी गयी थी आधारशिला
आइजीएच के बर्न यूनिट की आधारशिला 21 मार्च, 1976 को तत्कालीन केंद्रीय इस्पात और खान मंत्री चंद्रजीत यादव द्वारा रखी गयी थी. पिछले पांच दशकों में, आइजीएच स्थित बर्न सेंटर इस पूरे क्षेत्र के मरीजों के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है और बर्न प्रबंधन के क्षेत्र में करुणापूर्ण देखभाल, नैदानिक उत्कृष्टता तथा नवीन उपचार प्रदान करने के अपने मिशन को निरंतर जारी रखे हुए है.
