Sambalpur News: अनुगूल में नर्सिंग घोटाला : झारखंड की ठेका संस्था को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश

Sambalpur News: अनुगूल के पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में नर्स नियुक्ति घोटाला मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है.

Sambalpur News: अनुगूल जिले में स्टाफ नर्स नियुक्ति घोटाला में प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गयी है. झारखंड की आउटसाेर्सिंग ठेका संस्था कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स को ब्लैक सूची में डाल दिया गया है. जिले के सभी सरकारी विभागों, प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय उद्योगों में टेंडर और आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में इस संस्था के भाग लेने पर रोक लगा दी गयी है. जिला प्रशासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.

प्रशानिक जांच में लापरवाही का हुआ खुलासा

आदेश के अनुसार, तालचेर स्थित पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में नर्स नियुक्ति के लिए कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स को आउटसोर्सिंग एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया था. लेकिन जांच में इस संस्था द्वारा व्यापक अनियमितता किये जाने का पता चला है. प्रशासन ने जांच के दौरान पाया कि संस्था ने गंभीर लापरवाही बरती है. इसके बाद संस्था को ब्लैक लिस्ट में डालने का फैसला लिया गया है. साथ ही पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के सभी स्टाफ नर्सों के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए कमेटी गठित की गयी है. लेकिन 106 नर्सों ने बार-बार निर्देश के बावजूद अपने प्रमाण पत्रों की जांच नहीं करायी है और ड्यूटी पर भी नहीं आ रहे हैं. संदेह जताया जा रहा है कि इन नर्सों ने फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरी हासिल की है. इस मामले में विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला है. उनका आरोप है कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है.

अधिकारियों की भूमिका की भी हो जांच

इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है. वकील भूपेश चंद्र प्रधान ने कहा है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सिर्फ ठेका संस्था को दोषी ठहराना काफी नहीं है, बल्कि संस्था के मालिक और नियुक्ति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पवित्र मोहन प्रधान मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है और उनकी भी जांच होनी चाहिए.

अनुगूल में सात नर्सिंग कॉलेजों का एनओसी खारिज

अनुगूल जिले में सात निजी नर्सिंग कॉलेजों का एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) खारिज कर दिया गया है. ओडिशा नर्स एंड मिडवाइफरी रेजिस्ट्रेशन काउंसिल की जांच में इन कॉलेजों में आवश्यक मानदंडों की कमी पायी गयी है. इसके अनुसार कुछ कॉलेजों में आवश्यक भौतिक संरचना नहीं है, तो कुछ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की कमी है. एनओसी खारिज होने से इन कॉलेजों में नामांकन अनिश्चित हो गया है. हालांकि कॉलेज प्रबंधन अभी भी नामांकन के लिए छात्रों को आकर्षित करने में लगा हुआ है. जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है, यह मामला नर्सिंग काउंसिल के अधीन है. प्रशासन की ओर से छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गयी है कि वे ऐसे कॉलेजों में नामांकन से बचें, अन्यथा उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

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By Bipin kumar yadav

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