Bhubaneswar News: आदिवासियों की आजीविका के लिए वन उत्पादों के 100 प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किये जायेंगे : मोहन माझी

Bhubaneswar News: भुवनेश्वर में 76वें वन महोत्सव सप्ताह में मुख्यमंत्री मोहन माझी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी से पौधे लगाने की अपील की.

Bhubaneswar News: भुवनेश्वर स्थित बीएम हाइस्कूल में 76वें वन महोत्सव सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पौधरोपण किया. उन्होंने कहा कि एक सुंदर और हरित ओडिशा का निर्माण विजन ओडिशा 2036 के अंतर्गत राज्य सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य है. इसे प्राप्त करने के लिए सामुदायिक नेतृत्व आधारित वन प्रबंधन के माध्यम से 10 लाख हरित आजीविकाएं सृजित की जायेंगी और ओडिशा को पर्यावरण पर्यटन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में विकसित किया जायेगा.

इस वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत 7.5 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ओडिशा योजना के तहत आदिवासियों की आजीविका बढ़ाने के लिए साल, तेंदू, बांस और औषधीय पौधों से जुड़ी प्रोसेसिंग यूनिटों की स्थापना की जायेगी. इसके तहत 100 से अधिक प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना की जायेगी, जिससे राज्य को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय प्राप्त होने का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से पिछले वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत राज्य में 6.69 करोड़ पौधे लगाये गये थे, जिससे ओडिशा ने पूरे देश में चौथा स्थान प्राप्त किया था. इस वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत 7.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव के लिए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष 19 लाख ताड़ के पेड़ लगाए थे, और इस वर्ष 18 लाख ताड़ के पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

वनों में आग की घटनाएं रोकने के लिए एआइ तकनीक की ली जा रही मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिमिलिपाल को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिलने के बाद ‘आमो सिमिलिपाल योजना’ के तहत राज्य सरकार ने वहां वन्यजीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत से एक नयी पहल शुरू की है. इसके साथ ही सिमिलिपाल जैसे जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित वनाग्नि पहचान प्रणाली को लागू किया गया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में पीड़ितों को दी जाने वाली अनुकंपा राशि छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गयी है. इसके साथ ही अन्य मुआवजा राशियों में भी वृद्धि की गयी है. वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा कि पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और मानव कल्याण के लिए जंगल बहुआयामी लाभ प्रदान करते हैं. मौके पर एकाम्र भुवनेश्वर विधायक बाबू सिंह, भुवनेश्वर मेयर सुलोचना दास, वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सत्यव्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख सुरेश पंत, बीएम हाइस्कूल के प्रधानाध्यापक सीताकांत मोहंती आदि मौजूद थे.

वन और वन्य जीव संपदा की सुरक्षा के लिए विभिन्न पुरस्कारों के पुनर्गठन की घोषणा की

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य में वनों के विकास, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा जैसे कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस, 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस, जुलाई माह में वन महोत्सव सप्ताह और अक्तूबर माह में वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर विभिन्न कर्मचारियों, संस्थाओं और विशिष्ट व्यक्तियों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं. इन कार्यों में फील्ड कर्मचारियों और आम जनता की भागीदारी को और अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इन पुरस्कारों का पुनर्गठन किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया पुरस्कार ढांचा आज से ही प्रभावी हो गया है. कई पुरस्कारों की संख्या और पुरस्कार राशि में भी वृद्धि की गयी है.

कलाहांडी और करंजिया की वन सुरक्षा समिति सम्मानित

मुख्यमंत्री के राज्य स्तरीय पुरस्कार से इस वर्ष वन सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में कलाहांडी की तुलंगपदर वन सुरक्षा समिति और करंजिया फॉरेस्ट डिवीजन की पाहाड़पुर वन सुरक्षा समिति को सम्मानित किया गया. इन दोनों समितियों को कुल 4 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रमाणपत्र प्रदान किये गये हैं. कालाहांडी नॉर्थ फॉरेस्ट डिवीजन की तुलंगपदर वन सुरक्षा समिति ने बाजारगढ़ जंगल के 50 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण कर जंगल को पुनर्जीवित करने में सफलता प्राप्त की है. समिति के प्रयासों के कारण पिछले तीन वर्षों में इस जंगल क्षेत्र में एक भी वनाग्नि की घटना नहीं घटी है. इसी तरह, करंजिया फॉरेस्ट डिवीजन की पाहाड़पुर वन सुरक्षा समिति ने बुड़िपाट जंगल के 159 हेक्टेयर क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर जंगल की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की है. पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में भी कोई वनाग्नि की घटना सामने नहीं आयी है. इसके अलावा, मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं पर भी समिति ने प्रभावी नियंत्रण पाया है.

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Published by: Bipin kumar yadav

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