मध्य प्रदेश में सामूहिक विवाह से पहले लड़कियों का कराया गया प्रेग्नेंसी टेस्ट, विवाद बढ़ा

प्रेग्नेंसी टेस्ट किये जाने के बाद उत्पन्न विवाद पर बयान देते हुए जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि एनीमिया की जांच के दौरान कुछ लड़कियों ने बताया कि उनका पीरियड्‌स बंद है, जिसके बाद उनकी जांच हुई तो पता चला कि वे गर्भवती हैं.

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के लाभार्थियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट किये जाने की खबरों के बाद वहां विवाद उत्पन्न हो गया है. जानकारी के अनुसार यह घटना मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की है, जहां सामूहिक विवाह से पहले लड़कियों का गर्भावस्था परीक्षण किया गया.

डीएम ने टेस्ट से नहीं किया इनकार

प्रेग्नेंसी टेस्ट किये जाने के बाद उत्पन्न विवाद पर बयान देते हुए जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि एनीमिया की जांच के दौरान कुछ लड़कियों ने बताया कि उनका पीरियड्‌स बंद है, जिसके बाद उनकी जांच हुई तो पता चला कि वे गर्भवती हैं. गौरतलब है कि जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि लड़कियों की प्रेग्नेंसी टेस्ट हुई, लेकिन उन्होंने यह समझाया कि आखिर क्यों इन लड़कियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट हुआ है.

एनीमिया परीक्षण के दौरान सच  हुआ उजागर

डीएम ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया के परीक्षण के दौरान, पांच लाभार्थियों ने डॉक्टरों को बताया कि उन्हें पीरियड्‌स नहीं आ रहा है. इसके बाद डॉक्टरों ने यूरिन टेस्ट किया और पांचों गर्भवती पायी गयीं. इन लड़कियों के गर्भवती होने की सूचना डॉक्टर्स ने दी थी इसलिए उन लाभार्थियों को सामूहिक विवाह में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी.

दो सौ से अधिक लोगों की हुई है शादी

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार लाभार्थियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट नहीं कराया गया, बल्कि एनीमिया टेस्ट के दौरान लाभार्थियों की डाॅक्टर्स से बातचीत हुई और उसके बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट हुई. उन पांच लोगों के अलावा अन्य 219 लोगों की शादी समय पर हुई.

मेडिकल जांच में गर्भवती पायी गयी लाभार्थी

सूचीबद्ध पांच लाभार्थियों में से एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए कहा मैं जिस व्यक्ति से शादी करना चाह रही थी, मैं उसके साथ पिछले पांच महीने से रह रही हूं. मैंने सभी जरूरी शर्तें पूरी कर दीं, लेकिन बाद में यह बताया गया कि सामूहिक विवाह वाली सूची में मेरा नाम नहीं है, चूंकि मेडिकल जांच में मैं गर्भवती पायी गयी थी इसलिए मेरा नाम सूची से हटा दिया गया.

पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा यह महिलाओं का अपमान

विवाह से पूर्व लड़कियों की प्रेग्नेंसी टेस्ट कराये जाने पर पूर्व सीएम कमलनाथ ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने ट्‌वीट कर इस मसले पर आपत्ति जतायी है और राज्य सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा है कि क्या गरीब और आदिवासी समुदाय की महिलाओं का मुख्यमंत्री की नजर में कोई सम्मान नहीं है? उन्होंने कहा है कि विवाह पूर्व लड़कियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट कराना उनका अपमान है. ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के लाभार्थियों को सरकार की ओर से नकद सहायता दी जाती है, साथ ही उपहार स्वरूप कई सामान भी दिये जाते हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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