West Singhbhum News, पश्चिमी सिंहभूम (सुबोध मिश्रा): समाज को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने और एक स्वस्थ वातावरण के निर्माण के उद्देश्य से बुधवार को पश्चिमी सिंहभूम स्थित नोवामुंडी प्रखंड सभागार में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्रिय भागीदारी रही. कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मति देवी उपस्थित रहीं, जिन्होंने उपस्थित महिलाओं को नशे के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाने के लिए प्रेरित किया.
नशे के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर प्रहार
सभा को संबोधित करते हुए सीडीपीओ मति देवी ने कहा कि नशा एक ऐसी बुराई है जो व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट जाती है. उन्होंने विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि नशा न केवल मानसिक संतुलन बिगाड़ता है, बल्कि इसके कारण पारिवारिक संबंधों में दरार आती है और सामाजिक प्रतिष्ठा का भारी नुकसान होता है. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नशे की लत व्यक्ति को गहरे आर्थिक संकट में धकेल देती है और कई बार बेबसी में व्यक्ति अपराध की ओर भी कदम बढ़ा देता है.
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स्वास्थ्य और पोषण का अनूठा संगम
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान केवल नशे के विरोध पर ही बात नहीं हुई, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और पोषण अभियान से भी जोड़ा गया. अधिकारियों ने बताया कि एक नशामुक्त व्यक्ति ही संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली का लाभ उठा सकता है. पोषण अभियान के माध्यम से आंगनवाड़ी सेविकाओं को समझाया गया कि वे अपने क्षेत्रों में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ नशा मुक्ति को भी अपनी प्राथमिकता में शामिल करें.
सेविकाओं ने ली सामूहिक शपथ
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा वह रहा जब सभागार में मौजूद सभी लेडी सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकाओं ने एक स्वर में सामूहिक शपथ ली. उन्होंने संकल्प लिया कि वे खुद नशा नहीं करेंगी और अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामीणों को जागरूक कर नोवामुंडी को नशा मुक्त प्रखंड बनाने में अपना योगदान देंगी. कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि जब तक ग्रामीण स्तर पर महिलाएं जागरूक नहीं होंगी, तब तक नशा मुक्ति का सपना साकार होना कठिन है.
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