Thailand Shooting Championship, चाईबासा (दशमत सोरेन की रिपोर्ट) : सपने देखने का हक हर किसी को है, लेकिन कभी-कभी गरीबी इन सपनों की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोकचो प्रखंड अंतर्गत सुरलु निवासी 31 वर्षीय जयप्रकाश बिरुली इसका जीता जागता उदाहरण हैं. एयर गन शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का सपना देखने वाले इस आदिवासी युवा ने दिन-रात मेहनत कर भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई है, लेकिन अब थाईलैंड जाने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं.
झारखंड से चयनित होने वाले एकमात्र खिलाड़ी
नेशनल शूटिंग एसोसिएशन ऑफ थाईलैंड की ओर से 10 से 12 मई तक बैंकॉक में ‘तीसरे इंडिया बनाम थाईलैंड राइफल एंड पिस्टल शूटिंग-2026’ का आयोजन किया जा रहा है. इस चैंपियनशिप के लिए भारत से कुल 24 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिसमें झारखंड से एकमात्र खिलाड़ी जयप्रकाश बिरुली शामिल हैं. जनवरी 2026 में गोवा के पणजी में हुए सेलेक्शन ट्रायल में उनके शानदार प्रदर्शन के आधार पर यह चयन हुआ है.
Also Read: झारखंड में गैस उपभोक्ताओं के लिए नए नियम: 1 मई से OTP अनिवार्य और 5 किलो वाले सिलेंडर पर बढ़ी सख्ती
1.65 लाख के लिए दर-दर भटक रहा होनहार
बैंकॉक जाने और प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जयप्रकाश को 1.65 लाख रुपये की जरूरत है. एक साधारण किसान परिवार से आने वाले जयप्रकाश का कहना है कि घर में सिर्फ धान का ढेर है, जिसे बेचकर भी इतनी बड़ी राशि जमा नहीं की जा सकती. उन्होंने मदद के लिए मंत्री दीपक बिरुआ, चाईबासा उपायुक्त और टाटा स्टील फाउंडेशन को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कहीं से उम्मीद की किरण नजर नहीं आई है.
अभावों के बीच सफलता की कहानी
जयप्रकाश का संघर्ष उनकी परिस्थितियों से कहीं बड़ा है. जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए 2.50 लाख रुपये के एयरगन की जरूरत होती है, वहीं जयप्रकाश कोलकाता से खरीदे गए महज 15 हजार रुपये के एयरगन से गांव में ही अभ्यास कर रहे हैं. वर्ष 2007 में पिता के निधन के बाद, छह भाई-बहनों में सबसे बड़े जयप्रकाश ने परिवार की खातिर पढ़ाई छोड़ खेती शुरू कर दी थी. तीन साल पहले एक कराटे प्रशिक्षक की प्रेरणा से उन्होंने शूटिंग की शुरुआत की और महाराष्ट्र में ट्रेनिंग ली. मई 2025 में गोवा में हुए एयरगन शूटिंग चैंपियनशिप में वे तीसरे स्थान पर रहे थे. प्रतियोगिता शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और जयप्रकाश को डर है कि कहीं आर्थिक तंगी की वजह से उनका थाईलैंड जाने का सपना न टूट जाए.
