एक पारा शिक्षिका के भरोसे 80 नौनिहाल, बरामदे में चल रही पाठशाला

टोप्पो टोला प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। एक शिक्षिका के भरोसे 80 बच्चे बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। जानें पूरी खबर।

प्रमोद मिश्रा, पश्चिमी सिंहभूम: पश्चिमी सिंहभूम में आनंदपुरहारता पंचायत के टोप्पो टोला स्थित नव प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे यहां नामांकित 80 बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है. आलम यह है कि पूरे विद्यालय में पठन-पाठन की जिम्मेदारी महज एक पारा शिक्षिका के कंधों पर है. शिक्षकों की कमी के साथ-साथ यहां कमरों की भी भारी किल्लत है. मात्र दो कमरों के इस स्कूल में सभी बच्चों को बैठाना मुमकिन नहीं है, जिसके कारण अधिकतर छात्रों की कक्षाएं बाहर बरामदे में संचालित होती हैं. जगह न होने से सरकार द्वारा दिए गए बेंच-डेस्क कमरों में बंद धूल फांक रहे हैं. हद तो यह है कि स्कूल में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) बनाने के लिए रसोइघर तक नहीं है, जिससे रसोइयों को खुले में खाना बनाना पड़ता है. बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है.

जान जोखिम में डालकर स्कूल आते हैं मासूम

इस विद्यालय की सबसे बड़ी और संवेदनशील समस्या यहां तक पहुंचने का रास्ता है. आजादी के इतने वर्षों बाद भी स्कूल के लिए आज तक पक्की सड़क या पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हुआ है. मासूम बच्चे रोजाना पगडंडियों और एक खतरनाक पहाड़ी नाले को पार करके स्कूल पहुंचते हैं. मॉनसून के दिनों में जब पहाड़ी नाले का जलस्तर बढ़ जाता है, तब बच्चों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी हो जाती है. हमेशा किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है, जिसके कारण खराब मौसम में बच्चे स्कूल भी नहीं आ पाते हैं. स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से स्कूल में अतिरिक्त शिक्षकों की अविलंब नियुक्ति करने, नये कमरों व रसोइघर का निर्माण कराने के साथ-साथ स्कूल तक सुरक्षित सड़क और पुल बनाने की मांग की है.


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By Pratap pramanik

प्रताप प्रमाणिक वर्ष 2002 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है. उन्हें क्राइम और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में विशेष विशेषज्ञता हासिल है. वर्तमान में वे प्रभात खबर में संवाददाता, चक्रधरपुर कार्यालय सह प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें डिजिटल जर्नलिज्म का तीन वर्षों का अनुभव है. अपने अनुभव, जमीनी रिपोर्टिंग और तथ्यपरक पत्रकारिता के दम पर उन्होंने एक विश्वसनीय और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई है.

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