चांडिल : क्रशर बंद होने के बाद गांव के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. रोजगार नहीं मिलने पर रविवार को चौका थाना क्षेत्र के चांदुडीह गांव से लगभग दो दर्जन मजदूर रोजगार के लिए अपने-अपने परिवार के साथ बोरिया बिस्तर लेकर पलायन किये. मजदूरों का कहना है कि हमलोगों के रोजगार का मुख्य स्रोत पत्थर ही है. पत्थर छोड़कर क्षेत्र में दूसरा कोई काम नहीं बचा है. पत्थर तोड़ कर परिवार का भरण-पोषण करते है. लेकिन क्षेत्र में क्रशर बंद हो गया है. जिस कारण हमलोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है. हमारे बच्चाें को भर पेट भोजन व पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
हमलोग मजबूर होकर गांव छोड़ कर पलायान कर रहे है. चांदुडीह गांव के मजदूर ग्रामीण विष्णुपद उरांव ने कहा कि हमारा पूरा गांव पत्थर पर ही निर्भर करता है. पथरीला जगह होने के कारण गांव के लोग खेती भी नहीं कर पाते है. वर्षों से पत्थर तोड़कर परिवार के लिए दो वक्त की अनाज जुटाते है. ग्रामीण लक्ष्मी सोरेन ने कहा कि पत्थर तोड़कर ही अपना परिवार चलाते है. आज क्षेत्र के क्रशर बंद पड़े हुए है. हमलोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है.
परिवार का पेट भरना मुश्किल हो गया है. गांव के करीब दो दर्जन परिवार अन्य जगहों पर काम व रोजगार की तलाश में जा रहे है. मालूम हो कि जिला प्रशासन की और से अवैध पत्थर खनन पर रोक लगा दिया गया है. जिस कारण चांडिल अनुमंडल के क्रशर बंद हो गये है. इस अवसर पर बुधनी उरांव, पीरु सिंह, नगेन मांझी, सोमबारी सोरेन, लक्ष्मी सोरेन, शत्रुघ्न उरांव, मुकूंदरी सोरेन आदि महिला- पुरुष व बच्चें उपस्थित थे.
