परिजनों ने डॉक्टर का पकड़ा कॉलर, दी धमकी

रेलवे अस्पताल : चीफ कंट्रोलर को रेफर नहीं करने पर हंगामा घायल महिला. चक्रधरपुर : शुक्रवार को रेलवे अस्पताल चक्रधरपुर में भरती रेलवे परिचालन विभाग की चीफ कंट्रोलर शकुंतला सांडिल को रेफर नहीं करने पर परिजनों ने हंगामा करते हुए डॉ एसबी ओझा का कॉलर पकड़ लिया. इसके बाद घायल शकुंतला को रेलवे अस्पताल से […]

रेलवे अस्पताल : चीफ कंट्रोलर को रेफर नहीं करने पर हंगामा

घायल महिला.
चक्रधरपुर : शुक्रवार को रेलवे अस्पताल चक्रधरपुर में भरती रेलवे परिचालन विभाग की चीफ कंट्रोलर शकुंतला सांडिल को रेफर नहीं करने पर परिजनों ने हंगामा करते हुए डॉ एसबी ओझा का कॉलर पकड़ लिया. इसके बाद घायल शकुंतला को रेलवे अस्पताल से रेफर कर दिया गया. घटना शनिवार दोपहर करीब दो बजे की है.
जानकारी अनुसार शुक्रवार रात इंदिरा कॉलोनी में हुई वाहन दुर्घटना में घायल शकुंतला को रेलवे अस्पताल में भरती कराया गया था. शनिवार को घायल महिला के परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर ले जाना चाह रहे थे. इसे लेकर परिजनों ने डॉ ओझा समेत रेलवे के वरीय अधिकारियों से रेफर करने की मांग की, लेकिन डॉ ओझा ने घायल महिला की स्थिति से अवगत कराते हुए किसी तरह का खतरा नहीं होने की बात कही. इस पर एक परिजन ने डॉ ओझा का कॉलर पकड़ लिया. साथ ही मारपीट करने की कोशिश की.
इसे देख वहां मौजूद अस्पताल कर्मियों ने उस व्यक्ति को रोक लिया. हालांकि इसके बाद रेल चिकित्सक डॉ ओझा ने रेल आवास जाकर दूरभाष से रेफर करने की स्वीकृति दे दी. मालूम हो कि उक्त दुर्घटना में बोलेरो पर सवार कार्मिक विभाग (रिव्यू) के कार्यालय अधीक्षक एमएस लागुरी की मौके पर ही मौत हो गयी थी. जबकि चीफ कंट्रोलर शकुंतला सांडिल के चेहरे पर चोट आयी थी.
कॉलर पकड़ा, मारपीट की कोशिश की : डॉ ओझा
मामले पर शल्य चिकित्सक डॉ एसबी ओझा ने कहा कि घायल महिला की स्थिति से परिजनों को अवगत करा दिया गया था. महिला को किसी तरह का खतरा नहीं था. जरूरत होने पर रेफर करने का सुझाव दिया, लेकिन परिजनों में से एक शराबी व्यक्ति ने कॉलर पकड़ कर रेफर करने की धमकी दी. इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के हस्तक्षेप पर मामला शांत हुआ. घायल महिला को रेफर कर दिया गया है.
नहीं दी जा रही है सुरक्षा : सीएमएस
रेलवे अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरके पाणि ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त रफीक अहमद अंसारी से अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था देने की मांग की गयी है, लेकिन आयुक्त ने आरपीएफ नहीं होने की बात कही. इसके बाद निजी सुरक्षा व्यवस्था कराने के लिए भी पत्र भेजा गया, लेकिन फंड नहीं होने पर निजी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गयी है.

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