नुइया से सलाई तक 27 किमी सड़क निर्माण कार्य करा रही रामकृपाल सिंह प्राइवेट लिमिटेड की गाड़ियों को फूंका
चाईबासा/किरीबुरू : लेवी नहीं देने के कारण नक्सलियों ने सारंडा में नुईया से सलाई तक 27 किमी सड़क निर्माण कार्य करा रही रामकृपाल सिंह प्राइवेट लिमिटेड की गाड़ियों को फूंक डाला. कंपनी जिला में कई योजनाओं का कार्य कर रही है. नक्सलियों ने हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र के इलिगड़ा स्थित क्रशर प्लांट के संचालन के समय […]
चाईबासा/किरीबुरू : लेवी नहीं देने के कारण नक्सलियों ने सारंडा में नुईया से सलाई तक 27 किमी सड़क निर्माण कार्य करा रही रामकृपाल सिंह प्राइवेट लिमिटेड की गाड़ियों को फूंक डाला. कंपनी जिला में कई योजनाओं का कार्य कर रही है. नक्सलियों ने हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र के इलिगड़ा स्थित क्रशर प्लांट के संचालन के समय 50 लाख की लेवी कंपनी से मांगी थी.
लेकिन कंपनी ने लेवी देने के बजाए 12 जनवरी को घटना कि शिकायत पुलिस को कर दी. हालांकि इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पायी थी. माना जा रहा है कि इसी के बाद नक्सलियों ने कंपनी के सामानों को टारगेट कर घटना को अंजाम दिया. पुलिस दोनों घाटनाओं को जोड़ कर देख रही है.
जनरल ट्रेडर्स क्रशर से भी मांगी थी लेवी
नक्सलियों ने पिछले साल हाटगम्हरिया स्थित जनरल ट्रेडर्स क्रशर के मालिक से 14 सितंबर को 20 लाख की लेवी मांगी थी. लेवी देने की जगह मालिक ने पुलिस को इसकी सूचना दी. इसके बाद सक्रिय पुलिस ने छह नवंबर को लेवी लेने आये एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.
रोआम में सीआरपीएफ व पुलिस की हलचल से परेशान
माओवादी पिछले कुछ दिनों से रोआम क्षेत्र के जंगल मे पुलिस व सीआरपीएफ के लगातार अभियान चलाये जाने से भी नाराज थे़ नक्सलियों को यह लग रहा था कि ठेकेदार की ओर से ही पैसा देने से बचने के लिए पुलिस को क्षेत्र में गतिनिधि बढ़ाने के लिए मैनेज किया है. वहीं माओवादियों को यह भी आशंका थी कि आने वाले दिनों में सरकार रोआम में सीआरपीएफ कैम्प बनाने की तैयारी में है. तब यह सड़क पुलिस को लाभ व नक्सलियों को निरंतर नुकसान पहुंचाने में मददगार बनेगी.
एक दिन पूर्व युवकों ने की थी रेकी
बताया जा रहा है कि घटना से एक दिन पूर्व दो अज्ञात युवकों ने रोआम आदि क्षेत्रों की रेकी कर यह पता लगाने का प्रयास किया था कि कंपनी के वाहनों को कहां-कहां खड़ा किया जाता है. सूत्रों के अनुसार माओवादियों ने सड़क निर्माण शुरू होने से पूर्व ही आरकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी से करोड़ों की लेवी मांगी थी. बीते साल सितम्बर माह में नक्सलियों ने कार्य बंद भी करा दिया था. बाद में समझौता के तहत बतौर प्रथम किश्त सात लाख का भुगतान अक्टूबर माह में किया था.
इसकी रसीद भी माओवादियों ने ठेकेदार को दी थी. इसके बाद से माओवादी लगातार लेवी की मांग कर रहे थे़
पहले वन विभाग का पेंच अब नक्सली दहशत
किरीबुरू. सारंडा में लगभग 27 किलोमीटर लंबी नुईया-सलाई सड़क का निर्माण आरकेएस कंस्ट्रक्शन कंपनी करोड़ों की लागत से बना रही है. यह सड़क सात मीटर ब्लैक टॉप समेत कुल तेरह मीटर चौड़ी बनायी जायेगी. इस सड़क का निर्माण पहले वन विभाग के पेंच में फंस गया था. सड़क चौड़ीकरण व निविदा प्रक्रिया को लेकर वन विभाग व पथ निर्माण विभाग इसमें आमने-सामने आ गये थे. इस विवाद को सुलझाने के लिए कोल्हान आयुक्त अरुण की अगुवाई में उच्चस्तरीय बैठक बुायी गयी.
इसके बाद आयुक्त, उपायुक्त, डीएफओ, डीआइजी, एसपी आदि अधिकारियों ने कार्य स्थल का निरीक्षण कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया. अब निर्माण में दूसरी बड़ी बाधा नक्सलियों के रूप में सामने आयी है. इसे लेकर पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.
दर्जनों छोटे ठेकेदारों के समक्ष संकट
नक्सली घटना के कारण नुईया-रोवाम सड़क का काम रोक दिया गया है. इस निर्माण कार्य में आरकेएस कंपनी की ओर से पेटी में पुल-पुलिया का काम लेकर कई ठेकेदार काम करा रहे थे. इस दहशत के बीच सारंडा के दर्जनों छोटे ठेकेदारों व कार्य में जुटे मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है.
ऐसे ही एक छोटे ठेकेदार ने बताया की बाजार से ब्याज पर पैसे लेकर कंपनी से तीन पुलिया का काम करवा रहे थे. कंपनी की ओर से अब तक हमें एक भी पैसा नहीं मिला है. अगर काम बंद हुआ तो हम बरबाद हाे जायेंगे. यही नहीं सड़क नहीं बनने से विकास कार्य भी प्रभावित होगा.