192 साल से हो रही है मां काली की आराधना

चाईबासा : सदर बाजार स्थित काली मंदिर का गौरव 192 साल पुराना है. इस मंदिर की परंपरा रही है कि हर 12 साल पर मंदिर में स्थापित मां काली का प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. हर 12 साल पर मां की नयी प्रतिमा मंदिर में स्थापित की जाती है. इस साल 25 अक्तूबर को […]

चाईबासा : सदर बाजार स्थित काली मंदिर का गौरव 192 साल पुराना है. इस मंदिर की परंपरा रही है कि हर 12 साल पर मंदिर में स्थापित मां काली का प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. हर 12 साल पर मां की नयी प्रतिमा मंदिर में स्थापित की जाती है. इस साल 25 अक्तूबर को मां की प्रतिमा का भव्य विसर्जन किया जायेगा. ढ़ोल नगाड़े के साथ रात के साढ़े आठ बजे से प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम निर्धारित है.
1823 में हुई थी मंदिर की स्थापना
मां काली स्वप्नदृष्टा देवी के रूप में मंदिर में विराजमान हैं. इस मंदिर की स्थापना 1823 में हुई थी. धालभूमगढ़ (वर्तमान घाटशिला ) के राजा रामचंद्र धवल देेव को एक सपना आया था कि वह चाईबासा में मंदिर की स्थापना करें. इसके लिए एक विशेष ब्राम्हण की खोज का निर्देश था.
राजा ने अपना दूत भेजकर बंगाल के बांकुड़ा से जगन्नाथ गंगाोपध्याय नाम के एक ब्राम्हण की खोज की. जगन्नाथ गंगोपध्याय को भी मंदिर स्थापना करने का स्वप्न आया था.
तब जगन्नाथ काफी बूढ़े हो गये थे. इस कारण उन्होंने अपने पुत्र खेत्रो मोहन गंगोपध्याय को राजा के पास इस विषय पर मशविरा करने के लिए भेजा. खेत्रो के साथ राजा अपने बड़े पुत्र बलराम राय के साथ चाईबासा पहुंचे. और यहां मंदिर की स्थापना की गयी. तब से आज तक मंदिर में पूजा की परंपरा बरकरा है.

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