डीआरएम से शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
टाटा से गुवा के लिए सुबह में एकमात्र गाड़ी
चाईबासा : अगर आपको चाaईबासा रेलवे स्टेशन से टाटा-गुवा पैसेंजर (58109) पकड़ना है, तो कम से कम दो से ढ़ाई घंटे इंतजार करने की आदत डाल लें, क्योंकि यह ट्रेन कभी समय पर नहीं पहुंचती है. इसके कारण यात्रियों की परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. एक महीने से यह ट्रेन डेढ़ से ढाई घंटे की देरी से चाईबासा पहुंच रह रही है. यात्रियों की शिकायत के बाद भी रेलवे के अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. इधर एक महीने से स्थिति और खराब हो गयी है.
मालगाड़ी को प्राथमिकता देने में लेट होती हैं ट्रेनें : पैसेंजर ट्रेनों की बात करें तो वित्त वर्ष 2016-17 में समय पर पहुंचने की औसतन दर 76.53 फीसदी रही, जो वर्ष 2017-18 में गिरकर 72.66 फीसदी रह गयी. टाटा-गुवा रूट पर ट्रेनों के लेट होने के पीछे मालगाड़ी को प्राथमिकता देना बताया जा रहा है. इस रूट में कुल 7 यात्री ट्रेनें चलती हैं. इसमें रोजाना चलने वाली यात्री ट्रेन संख्या चार है. जबकि रोजाना 90 से अधिक मालगाड़ी चलती है.डेढ़ घंटे के रास्ते में रोजाना ढ़ाई घंटे लेट!
दरअसल टाटा-गुवा पैसेंजर टाटानगर से सुबह 7.30 बजे खुलती है. इसका चाईबासा में पहुंचने का समय सुबह 8.57 बजे है. यानि टाटा से चाईबासा पहुंचने में 1 घंटा 27 मिनट लगता है, जबकि यह ट्रेन औसतन 2 से ढ़ाई घंटे लेट रहती है. कभी-कभार ट्रेन साढ़े पांच घंटे तक लेट चलती है. गुवा के लिए टाटा से सुबह में यह एकमात्र गाड़ी है. कई बार दैनिक यात्रियों ने डीआरएम से शिकायत की, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है.
