अर्धसैनिक बलों की कॉबिंग से निबटने की तैयारी में नक्सली
पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान हुए सतर्क
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम में बीते एक वर्ष में नक्सलियों के खिलाफ कई ऑपरेशन चलने से संगठन कमजोर हुआ है. ऐसे में सारंडा, कोल्हान व पोड़ाहाट जंगल में नक्सली एक बार फिर पैर जमाने के लिए तेजी से रणनीति पर काम कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार इसके लिए नक्सलियों ने तीनों जंगलों के दर्जनों जगहों पर लैंड माइंस बिछाया है. नक्सली इस बार सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के साथ क्षेत्र में धाक बनाना चाहते हैं. जानकारी के अनुसार अर्धसैनिक बलों को भी अपने खुफिया सूत्रों से लैंड माइंस बिछाने की जानकारी मिली है. इसके बाद जिला पुलिस व अर्धसैनिक बल सतर्क हो गयी है. इसका पता लगाया जा रहा है कि नक्सलियों ने किन जगहों पर लैंड माइंस बिछाया है.
पनाह स्थल को सुरक्षित रखने के लिए प्लांट करते हैं बम
गौरतलब हो कि बीते मई माह में सर्च अभियान के दौरान अर्धसैनिक बलों ने पांच प्रेशर कुकर बम, 8 टिफिन बम, 7 केन बम बरामद किया था. वहीं जनवरी में चार आइइडी व 9 पीस डेटोनेटर बरामद किया गया था. नक्सली निरंतर अर्धसैनिक बलों से निबटने के लिए लैंड माइंस जगह-जगह प्लांट करते रहते हैं. खासकर जिन जगहों पर नक्सली पनाह लेते हैं. उन जगहों को सुरक्षित करने के लिए बम प्लांट करते हैं. इसे बाद में फिर से इस्तेमाल करने के लिए वहां छोड़ दिया जाता है.
कुमडीह व कुदलीबाद में देखा गया नक्सलियों का दस्ता
सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह पहले नक्सलियों का 25-30 सदस्यीय दस्ता सारंडा के कुमडीह, कुदलीबाद क्षेत्र में देखा गया था. ऐसी सूचना है कि दस्ता सारंडा के तितलीघाट, बहदा, कुमडीह गांव क्षेत्र के जंगलों में जवानों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कुछ लैंड माइन बिछा रखा है. वहीं नक्सलियों ने कोल्हान रिजर्व वन प्रमंडल के नक्सल प्रभावित बाई बोरोई, सांगाजाटा, सोवां, लाजोरा, कुलसूता आदि क्षेत्र के जंगलों में लैंड माइन लगाया है. इससे पुलिस व सीआरपीएफ को निशाना बनाया जा सकता है.
मचानों पर रहकर पुलिस पर नजर रख रहे नक्सली
नक्सल प्रभावित क्षेत्र के खेतों व जंगलों में कुछ स्थानों पर जानवरों से बचने के लिए लकड़ी के बने मचानों का इस्तेमाल नक्सली पुलिस पर नजर रखने के लिए कर रहे हैं. हालांकि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान हुई प्रारम्भिक गलतियों से सीख लेते हुए पुलिस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. इसका नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस को शून्य नुकसान हुआ है. वहीं अप्रत्याशित सफलता मिली है.
अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां चला रहीं सर्च अभियान
दूसरी ओर से नक्सलियों की ओर से बिछाये गये लैंड माइंस को नष्ट करने के लिए अर्धसैनिक बल लगातार अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है. लैंड माइंस की सूचना के आधार पर अर्धसैनिक बलों की छोटी टुकड़ियां संभावित स्थानों पर लगातार सर्च अभियान चला रही है.
