कोल्हान के जंगलों में फिर घुसने की तैयारी में नक्सली

सारंडा में लंबे अंतराल के बाद दिखी नक्सली गतिविधियां 20-30 सदस्यों वाला हथियारबंद दस्ता 21 अगस्त को जुटा था वर्षों पुराने कॉरिडोर का इस्तेमाल कर रहे हैं नक्सली किरीबुरू : लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सारंडा में नक्सल गतिविधियां की खबर है. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि नक्सली ओड़िशा से […]

सारंडा में लंबे अंतराल के बाद दिखी नक्सली गतिविधियां

20-30 सदस्यों वाला हथियारबंद दस्ता 21 अगस्त को जुटा था
वर्षों पुराने कॉरिडोर का इस्तेमाल कर रहे हैं नक्सली
किरीबुरू : लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सारंडा में नक्सल गतिविधियां की खबर है. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि नक्सली ओड़िशा से झारखंड में घुसने की तैयारी कर रहें है या झारखंड से ओड़िशा. यह साफ है कि नक्सलियों ने इसके लिये वर्षों पुराने कॉरीडोर का इस्तेमाल किया है. सूत्रों के अनुसार नक्सलियों ने किसी खास वजह से फिर सक्रियता बढ़ायी है. माओवादियों का 25 से 30 सदस्यों वाला हथियारबंद दस्ता 21 अगस्त को सारंडा के एक ग्रामीण के जंगल में पनाह ली थी.
सांगाजाटा जंगल में प्रवेश कर सकते हैं
सूत्रों का कहना है कि नक्सलियों का यह दस्ता उक्त जंगल से घाटकुड़ी पहाड़ पर स्थित एक खदान क्षेत्र के जंगल रास्ते होकर कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र के जंगल होते हुए सांगाजाटा आदि क्षेत्रों में प्रवेश कर सकता है.
दस्ता का नेतृत्व कौन कर रहा यह स्पष्ट नहीं : संभावना जतायी जा रही है कि उसी में से नक्सलियों का एक दस्ता ओड़िशा होते सारंडा के किरीबुरु अथवा छोटानागरा थाना क्षेत्र के जंगलों होते कोल्हान के जंगल क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी में है. सारंडा में जो दस्ता है उसका नेतृत्व कौन कर रहा है यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है. लेकिन लंबे समय बाद सारंडा क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां सारंडा व पुलिस-प्रशासन के लिये अच्छा संकेत नहीं है.
ग्रामीणों से दूर जंगल में शरण ले रहे नक्सली
नक्सली सुरक्षा की दृष्टिकोण से ग्रामीणों से अपने आप को दूर रखते हुए गांव से दूर जंगल में शरण ले रहे हैं. गोइलकेरा थाना क्षेत्र के बोरोई, पराल, सांगाजाटा जैसे नक्सलियों के सुरक्षित व अभेद पहाड़ी को भेद पुलिस व सीआरपीएफ नक्सली कैंप तक पहुंच गये थे. यहां तक कि पुलिस की मुठभेड़ नक्सलियों के एक-एक करोड़ के इनामी केन्द्रीय स्तर के नेताओं के साथ हुई थी. ऐसे में बाकी स्थानों के जंगलों को भेदना पुलिस के लिए कठिन नहीं है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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