पंचायतों में कितना पानी, कितनी जरूरत? जल बजट से तय होगी जल सुरक्षा की योजना

पंचायतों के सामने जल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है. इसे दूर करने के लिए जल बजट और जल सुरक्षा योजनाएं तैयार की जाएंगी. जानें इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में.

रांची. पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक विपुल उज्ज्वल ने कहा कि ग्राम पंचायतों के सामने जल की उपलब्धता और उसका समुचित प्रबंधन बड़ी चुनौती है. सामुदायिक भागीदारी और पीयर लर्निंग के माध्यम से इस चुनौती का समाधान किया जा सकता है. वहीं पंचायती राज विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी ने कहा कि जल संसाधनों का सही आकलन कर जल बजट और वाटर सिक्योरिटी प्लान तैयार करना जरूरी है. इससे पंचायत स्तर पर जल संकट की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी.

दोनों अधिकारी गुरुवार को हेहल स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से पंचायतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण फेज-2 कार्यक्रम में बोल रहे थे. पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 सितंबर तक चलेगा.

योजनाओं में विभागों के बीच कन्वर्जेंस जरूरी

राजेश्वरी बी ने कहा कि जल संसाधनों की उपलब्धता और जरूरत का आकलन करने के बाद पंचायत स्तर पर जल बजट तैयार किया जाना चाहिए. इसके आधार पर वाटर सिक्योरिटी प्लान बनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जल से जुड़ी योजनाओं में विभिन्न विभागों के बीच कन्वर्जेंस भी जरूरी है. अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को आपस में जोड़कर पंचायतों में जल सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है.

पांच राज्यों के 30 मास्टर ट्रेनर ले रहे प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पंचायती राज विभाग के 30 मास्टर ट्रेनर शामिल हैं. प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और दीर्घकालीन जल सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षकों की क्षमता विकसित करना है.

कार्यक्रम में प्रदान संस्था की ओर से पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है.

ऑनलाइन जुड़ीं केंद्रीय संयुक्त सचिव

केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव पल्लवी साहनी कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल हुईं. उन्होंने कहा कि जल बजट और जल सुरक्षा योजना के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल शक्ति के आह्वान को जमीन पर उतारने की पहल की जा रही है. उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों का वास्तविक आकलन करने के बाद योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया.

मौके पर केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य देवेंद्र कुमार सिंह, प्रदान के आलोक जाना, अर्नब पात्रा, सुमेंद्र पुनिया, पौलोमी मलिक और मोहिनी साहा समेत अन्य मौजूद थे.

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By Manoj kumar lal

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