सुनील कुमार झा, रांची
जेएसएससी में गड़बड़ीः सरकार अब गंभीरता के साथ राज्य में आयोजित होने वाली नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार के लिए कदम बढ़ा रही है. रिफॉर्म को लेकर मंथन हो रहा है. राज्य के अभ्यर्थी लंबे समय से जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा प्रक्रिया में सामने आने वाली विसंगतियों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं. प्रभात खबर परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा उठाए गयए सवालों और सामने आई विसंगतियों को सामने लाने का प्रयास कर रहा है, ताकि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकें.
इस बीच अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अलग-अलग नियुक्ति में अलग-अलग मापदंड को आधार बनाकर नियुक्ति की अनुशंसा का मामला सामने आया है. ऐसा मामला ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) की नियुक्ति में सामने आया. अभ्यर्थियों का दावा है कि एक नियुक्ति में प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी प्रमाण पत्र के साथ सत्यापन वर्ष का प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है. वहीं, कुछ अन्य नियुक्तियों में केवल प्रमाण पत्र सत्यापन वाले वर्ष के प्रमाण पत्र को आधार बनाकर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गई. अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही आयोग द्वारा आयोजित अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर अलग-अलग नियम अपनाए जाने से परीक्षा पास करने के बावजूद ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) वर्ग के कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो रहे हैं. वहीं, जिन परीक्षाओं में केवल सत्यापन वर्ष के प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया, वहां आयोग की अनुशंसा पर कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी हो चुकी है.
गड़बड़ी का आधार : विज्ञापन में नहीं रहता है प्रमाण पत्र का उल्लेख
अभ्यर्थियों का कहना है नियुक्ति को लेकर जारी विज्ञापन में प्रमाण पत्र को लेकर कोई जानकारी नहीं दी जाती है. विज्ञापन में इसका कोई उल्लेख नहीं रहता कि अभ्यर्थी को किस वर्ष का प्रमाण पत्र जमा करना होगा. आवेदन के समय भी कोई प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाता है.
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इस गड़बड़ी को ऐसे समझें
महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में नियुक्ति की कर दी अनुशंसा
महिला पर्यवेक्षिका में अद्यतन ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई. इसमें वैसे अभ्यर्थी जिनके पास आवेदन वर्ष (2023) का प्रमाण पत्र नहीं था, उनकी नियुक्ति की अनुशंसा की गई. इनमें कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी मिल गया, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति को बाद में विभागीय स्तर पर रोक दिया गया. जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई है, उन्हें बाद में विभाग ने नोटिस जारी किया है.
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में रिजल्ट रोक दिया
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति में अलग-अगल विषयों में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाए गए 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है. इन अभ्यर्थियों से आवेदन जमा करने और प्रमाण पत्र सत्यापन दोनों वित्तीय वर्ष का ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में उर्दू विषय में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाए गए एक अभ्यर्थी को आवेदन की अंतिम तिथि तक अथवा उससे पूर्व के ईडब्ल्यूएस कोटि का प्रमाण पत्र मांगा गया.
जानें, क्या कहता है नियम
ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (नन क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र निर्धारित वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी किए जाते हैं. आवेदन के समय संबंधित वर्ष का वैध प्रमाणपत्र होना आवश्यक माना जाता है. लंबी भर्ती प्रक्रिया होने के कारण नियुक्ति के समय भी अद्यतन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना पड़ता है. इसीलिए आवेदन वर्ष और नियुक्ति वर्ष दोनों चरणों में पात्रता की जांच की जाती है.
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