सिमडेगा. सिमडेगा जिले को कुदरत ने बेपनाह खूबसूरती से नवाजा है. ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल, कल-कल बहती नदियां और हरियाली इसकी पहचान हैं. जिले में एक से बढ़ कर एक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां लोग खासकर नववर्ष पर पिकनिक मनाने व प्रकृति के बीच जश्न मनाने पहुंचते हैं. इस वर्ष भी सिमडेगा के सभी पर्यटन स्थल सैलानियों के स्वागत के लिए सज-धज कर तैयार हैं. नव वर्ष को लेकर प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएं की गयी हैं. वहीं जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह चौकस है. सुरक्षा को लेकर हर पर्यटन स्थल पर पुलिस बल की तैनाती की गयी है, ताकि सैलानी बेफिक्र होकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकें. केलाघाघ डैम: जिला मुख्यालय से मात्र चार किमी दूर स्थित केलाघाघ डैम सिमडेगा का प्रमुख आकर्षण है. दो पहाड़ों को जोड़ कर बना यह डैम, चारों ओर फैली हरियाली और कलकल करते झरनों के कारण बेहद मनोरम लगता है. यहां स्थित शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. सैलानी यहां नौका विहार का भी आनंद लेते हैं. दनगदी: बोलबा प्रखंड से करीब 15 किमी दूर दनगदी अपनी प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है. बड़े-बड़े चट्टान, नीले रंग का झरना और पहाड़ों से गिरता पानी सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है. नववर्ष पर झारखंड के अलावा जूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. यहां शिव मंदिर व गिरजाघर भी श्रद्धा का केंद्र हैं. राजाडेरा: ठेठईटांगर प्रखंड मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित राजाडेरा का अपना ऐतिहासिक महत्व है. चट्टानों की लंबी श्रृंखला और उनके बीच बहती नदी की धारा इस स्थल को खास बनाती है. नव वर्ष पर यहां सैलानियों की भारी संख्या में भीड़ उमड़ती हैं. मौके पर सैलानी प्राकृतिक दृश्यों को कैमरे में कैद करते हैं. भंवर पहाड़: कोलेबिरा प्रखंड मुख्यालय से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूरी पर स्थित भंवर पहाड़ भी एक ऐतिहासिक स्थल है. यहां जगन्नाथ स्वामी का मंदिर, गुफा, झरना और बलि स्थल सैलानियों को आकर्षित करते हैं. यहां की मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां भंवरों के सहारे शत्रुओं को पराजित किया गया था. बुधाधार पुल: केरसई प्रखंड से सात किलोमीटर दूर बुधाधार नदी पर बना लंबा पुल लोगों के लिए खास आकर्षण है. नव वर्ष पर बड़ी संख्या में सैलानी यहां पिकनिक और स्नान का आनंद लेने पहुंचते हैं. गोबरधंसा डैम: कोलेबिरा प्रखंड से तीन किलोमीटर दूर स्थित गोबरधंसा डैम पहाड़ों व जंगलों से घिरा हुआ है. यहां का शांत व मनोरम वातावरण सैलानियों को अपनी ओर खींचता है. नववर्ष पर यहां भारी भीड़ रहती है. कोलेबिरा डैम: प्रखंड मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित कोलेबिरा डैम पिकनिक के लिए उपयुक्त स्थल है. यहां स्थित शिव मंदिर आस्था का केंद्र है, जहां सैलानी पूजा-अर्चना के साथ प्रकृति का आनंद लेते हैं. कोयल नदी: बानो प्रखंड से लगभग 20 किलोमीटर दूर बहती कोयल नदी हरे-भरे जंगलों से घिरी हुई है. नव वर्ष पर यहां सैलानियों की अधिक भीड़ उमड़ती है, जो प्राकृतिक सौंदर्य के बीच समय बिताते हैं. सात कोठा: जलडेगा प्रखंड से 14 किलोमीटर दूर खरवागढ़ा गांव के पास स्थित सात कोठा प्रकृति प्रेमियों के लिए खास स्थल है. लुडगी नदी की तेज धाराएं जब सात कुंडों से होकर गुजरती हैं, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक हो जाता है. नव वर्ष पर यहां मेले जैसा माहौल रहता है. बसतपुर: पाकरटांड़ पंचायत के बसतपुर को प्रकृति ने विशेष रूप से सजाया है. चट्टानी मैदान और शंख नदी की धाराएं दर्जनों झरनों का रूप लेती हैं. नववर्ष पर सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा समेत कई जिलों से सैलानी यहां पहुंचते हैं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
