सिमडेगा. केरसई प्रखंड की बाघडेगा पंचायत अंतर्गत रायबेरा गांव निवासी मेरी किंडो ने अपनी मेहनत, लगन व सही मार्गदर्शन के बल पर न केवल अपनी पारिवारिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गयी हैं. वर्ष 2017 में मेरी किंडो जेएसएलपीएस अंतर्गत संत मोनिका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, जहां उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें समूह का सचिव बनाया गया. समूह से जुड़ने के बाद वे नियमित रूप से बैठकों में सहभागिता, बचत तथा समूह की विभिन्न गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगीं. समूह से जुड़ने से पूर्व मेरी किंडो की पारिवारिक व आर्थिक स्थिति सामान्य थी. परिवार की आजीविका मुख्य रूप से वर्षा आधारित धान की खेती और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे आय सीमित और अस्थिर रहती थी. स्वयं सहायता समूह से प्राप्त ऋण एवं जेएसएलपीएस के मार्गदर्शन के बाद उन्होंने आजीविका के नये आयाम अपनाये. रबी मौसम में समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने पत्ता गोभी, टमाटर और आलू की खेती की, जिससे 85,900 रुपये की आय हुई. इसके अलावा बकरी पालन से 35,600 रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की. इस प्रकार उनकी कुल आय 1,21,500 रुपये रही. इसके साथ उन्हें मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत अब तक 34,000 रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिसमें से 25,000 रुपये का निवेश उन्होंने खेती और पशुपालन गतिविधियों में पूंजी के रूप में किया. मेरी किंडो की सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य परिवार भी अब सब्जी खेती और पशुपालन को अपना रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आयवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है. मेरी किंडो की तीन पुत्रियां हैं. एक पुत्री नर्स के रूप में कार्यरत है, जबकि दो पुत्रियां रांची में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. परिवार में बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव, मंईयां योजना से प्राप्त सहयोग तथा जेएसएलपीएस के तकनीकी एवं संस्थागत मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप मेरी किंडो की पारिवारिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्तमान में उनका परिवार एक खुशहाल व आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर रहा है.
मेरी किंडो ने स्वयं सहायता समूह, खेती व पशुपालन से बदली आर्थिक तस्वीर
महिला सशक्तीकरण की मिसाल
