प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश देता है करम पर्व

प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश देता है करम पर्व

सिमडेगा. गोंडवाना विकास विद्यालय सह छात्रावास आंबेडकर नगर सलडेगा में करम पर्व मनाया गया. सात दिनों तक जावा की सेवा करने के बाद भादो की एकादशी के दिन पारंपरिक तरीके से गोंडवाना विकास विद्यालय के शिक्षकों की अगुवाई में सात दोहर पार कर करम राजा के प्रतीक करम की डाल की पूजा करते हुए अखाड़ा स्थल पर लाया गया. महिलाओं द्वारा करम राजा के पैर धोकर स्वागत कर अखरा स्थल में स्थापित किया गया. इसके बाद सभी उपासक भाई-बहन करम राजा का स्वागत जावा, खीरा, धूप-धुवन और डलसी लेकर पूजा-अर्चना के साथ की. सभी उपासकों ने अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की. करम पूजा के बाद शिक्षक दीपक मांझी ने करम पर आधारित पारंपरिक कहानी सुनायी. विद्यालय के संचालक कमलेश्वर मांझी ने कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ मानव के विनाश का मूल आधार है. यह पर्व हमें प्रकृति प्रेम, सामूहिकता और भाईचारा को बढ़ाने का संदेश देता है. हमें अपने पुरखों के इतिहास और परंपरा को नहीं भूलना है. प्रफुल चंद्र बेसरा ने कहा कि करम की मान्यता, दर्शन और परंपरा के नैसर्गिक रहस्यों को समझने की जरूरत है. आदिवासी समाज को आज सारा विश्व आशा भरी नजरों से देख रहा है. ऐसे में इस तरह के त्योहारों व परंपराओं के मूल अस्तित्व को बनाये रखना हमारी जिम्मेदारी है. हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने भी करम की महत्ता व परंपरा के विषय में लोगों को जानकारी दी. मौके पर शिक्षक भूषण नायक, राजनाथ मांझी ने भी अपना वक्तव्य दिया. सभी लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. रात में सभी अभिभावक व उपासक ने ढोल व मांदर के साथ पारंपरिक करम गानों पर झूमते-नाचते हुए अखाड़ा में करम राजा का गुणगान किया. कोलेबिरा से आये प्रसिद्ध कलाकार लालधन नायक ने एक से बढ़ कर एक करम गानों से झूमने पर मजबूर कर दिया. कलाकार सखी यादव, राजमोहन लकड़ा, शमीन नायक, महेश बड़ाइक, संजीत प्रधान, संगीता प्रधान जैसे कलाकारों ने भी अपने मधुर स्वर से अखाड़ा को सुहाना बना दिया. अखाड़ा स्थल को गुरुवार की अहले सुबह विधिवत करम राजा का नाचते-गाते हुए नदी के दोहर में पूजा के साथ विसर्जन किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के संस्थापक कमलेश्वर मांझी, शिक्षक अनुज बेसरा, दीपक मांझी, राजू मांझी, रघुनाथ मांझी आदि का अहम योगदान रहा.

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