दिव्यांग सुजन की फरियाद सुननेवाला कोई नहीं है

जलडेगा : गरीबी व तंगहाल जिंदगी जी रहे नौ साल के दिव्यांग सुजन सुरीन की फरीयाद सुननेवाला शायद कोई नहीं है. हाथ- पैर से दिव्यांग होने के बाद भी सुजन में पढ़ाई का जज्बा है. हर दिन सुजन जंगल उबड़-खाबड़ पथरीले रास्तों से गुजरते हुए लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचता है. […]

जलडेगा : गरीबी व तंगहाल जिंदगी जी रहे नौ साल के दिव्यांग सुजन सुरीन की फरीयाद सुननेवाला शायद कोई नहीं है. हाथ- पैर से दिव्यांग होने के बाद भी सुजन में पढ़ाई का जज्बा है. हर दिन सुजन जंगल उबड़-खाबड़ पथरीले रास्तों से गुजरते हुए लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचता है.
सुजन सुरीन की पारिवारिक हालत अत्यंत ही खराब है. गरीबी से तंग आकर सुजन के पिता कमाने के लिए बाहर चले गये. घर में सुजन अपनी मां व तीन बहनों के साथ रहता है. शारीरिक रूप से लगभग 65 प्रतिशत तक दिव्यांग होने के बाद भी आज तक सुजन को कोई सरकारी मदद नहीं मिली. इसके बावजूद वह पढ़ाई करना चाहता है. सुजन हाथ व पैर दोनों से लिखता है. मां इलिसबा सुरीन ने बताया कि मेडिकल द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्र के अनुसार सुजन 65 प्रतिशत दिव्यांग है. परिवार का भरण-पोषण वह स्वयं करती है. मजदूरी कर किसी प्रकार घर चला रही है. उनके पास राशन कार्ड तो है पर जॉब कार्ड नहीं है. स्कूल में बच्चे को ड्रेस भी नहीं मिलता है. कई बार आंगनबाड़ी केंद्र में तथा बीडीओ को आवेदन दे कर ट्राई साईकल की मांग की किंतु कोई असर नहीं हुआ. अगर ट्राई साईकल मिल जाता तो सुजन आराम से स्कूल जा सकता था.

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