सिमडेगा : परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में सोमवार को आदिवासी सेंगेल आंदोलन की सभा हुई. सभा में काफी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने भाग लिया. मौके पर आदिवासी सेंगेल आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष थियोडोर किड़ो मुख्य रूप से उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि सरकार समाज को बांटने का प्रयास कर रही है. सरना, ईसाई व आदिवासी के बीच फूट डालने के लिए धर्मांतरण कानून बनाया गया. वहीं आदिवासी-मूलवासी को आपस में लड़ाने के लिए कुरमी व तेली को आदिवासी बनाने का शिगूफा छोड़ा गया. उन्होंने कहा कि सरकार की जन विरोधी नीतियां आदिवासी-मूलवासी के अस्तित्व को ही समाप्त कर रख देगी. इससे संपूर्ण झारखंडी चिंतित हैं.
सेंगेल आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रदेव उरांव ने कहा कि सरकार ने असंवैधानिक लैंड बैंक बना कर गैर मजरूआ जमीन, सरना, मसना, नदी, नाला व जंगल आदि को उसमें शामिल कर दिया है. साथ ही उक्त जमीन को पूंजीपतियों को देने का काम भी शुरू कर दिया है. वहीं बाघ, हाथी परियोजना, नेतरहाट फिल्ड फायरिंग प्रोजेक्ट व कोयलकारो परियोजना स्थापित कर आदिवासियों को बेघर करना चाह रही है. प्रमंडलीय अध्यक्ष नील जस्टीन बेक ने कहा कि सरकार गलत स्थानीय नीति बना कर आदिवासियों की नौकरी लूटने का काम कर रही है. नौकरियों पर बाहरियों का कब्जा होता जा रहा है. ऐसी स्थिति में हमें जागरूक होकर अधिकार के लिए आगे आने की जरूरत है. इस मौके पर पुष्पा सेकुंदा, टेटे,सुधीर डांग व रितेश किड़ो सहित कई लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. कार्यक्रम का संचालन जिलाध्यक्ष सेबेस्तियन एक्का ने किया.
