आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिश: विक्सल

सिमडेगा/बानो : हाथी कॉरिडोर निर्माण के विरुद्ध प्रखंड कार्यालय के समीप आदिवासी एकता मंच, युवा जागृति मंच एवं डीवीएसएस समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को धरना दिया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि हाथी कॉरिडोर के नाम पर आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिश रची जा रही है. सरकार की […]

सिमडेगा/बानो : हाथी कॉरिडोर निर्माण के विरुद्ध प्रखंड कार्यालय के समीप आदिवासी एकता मंच, युवा जागृति मंच एवं डीवीएसएस समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को धरना दिया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि हाथी कॉरिडोर के नाम पर आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिश रची जा रही है. सरकार की इस मंशा को पूरा नहीं होने दिया जायेगा. सरकार ने राज्य में आदिवासियों के विकास के नाम पर लूट मचा रखी है.

हाथी कॉरिडोर निर्माण से आदिवासी मूलवासी बेघर हो जायेंगे. आदिवासी एकता मंच के अध्यक्ष सलन टोपनो कहा कि बानो प्रखंड के टोनिया, बंदोलमदा, पांगुर व लताकेल सहित 22 गांव हाथी कॉरिडोर के लिए चिह्नित किये गये हैं. यहां के लोगों को जंगल से प्रेम है. ऐसे में कॉरिडोर बनने से जिले के 60 गांव उजड़ जायेंगे. सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर डांग ने कहा कि ग्राम सभा से अनुशंसा कर गांव के ही भूमिहीनों को भूमि दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों को बसा कर यहां के लोगों को छलने का काम किया जा रहा है.

हाथी कॉरिडोर योजना जमीन छीनने का एक बहाना है, जिसके विरोध में सभी को एकजुटता का परिचय देना होगा. कार्यक्रम के बाद उपायुक्त के नाम बीडीओ को ज्ञापन सौंपा गया. मौके पर अनूप मिंज, बोआस टोपनो, सिलास टेटे, अजीत कंडुलना, अनिल लगून, हीरामणि मिंज व आमुस कंडुलना के अलावा काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.

हाथी कॉरिडोर निर्माण की कोई योजना नहीं: डीएफओ
आदिवासी संगठनों द्वारा हाथी कॉरिडोर निर्माण के विरुद्ध धरना, प्रदर्शन व आम सभा किया जा रहा है. साथ ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है. इस संबंध में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ताजवीर भगत ने प्रेस काॅन्फ्रेंस आयोजित कर कहा है कि हाथी कॉरिडोर निर्माण से संबंधित सरकार की कोई योजना नहीं है.
हाथी कॉरिडोर निर्माण के लिए अब तक जिले में किसी भी जंगल एवं जमीन को चिह्नित नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रस्ताव भेजा गया. कुछ आदिवासी नेता अपने लाभ के लिए भोले-भाले आदिवासियों को बेवकूफ बनाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हाथियों की सुरक्षा के लिए किसी गांव को खाली करने का आदेश भी नहीं दिया गया है.

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