खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई में केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से आयोजित तसर किसान समूह बैठक ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है. ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत हुई इस बैठक में स्थानीय तसर किसानों, रेशमदूतों और निजी ग्रेनेजर्स ने भाग लिया, जहां तसर कीटपालन को टिकाऊ और लाभकारी बनाने पर विमर्श हुआ.
असन और अर्जुन के पौधों का विस्तार जरूरी
वैज्ञानिक डुकरे प्रदीप गुलाबराव ने तसर उत्पादन में असन (Terminalia tomentosa) और अर्जुन (Terminalia arjuna) के पौधों के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि तसर कीटपालन की सफलता के लिए गुणवत्तापूर्ण पोषक पौधों की पर्याप्त उपलब्धता अनिवार्य है. किसानों को अपने खेतों के आसपास इन पौधों का अधिक से अधिक विस्तार करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उत्पादन को स्थायी आधार और किसानों को बेहतर आय मिल सके.
रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक पद्धतियों पर विशेष जोर
बैठक में तसर कीटों को बीमारियों से बचाने के उपायों पर तकनीकी सत्र आयोजित हुआ. कीटपालन क्षेत्र की स्वच्छता और समय पर कीटाणुशोधन को उत्पादन का मुख्य आधार बताया गया. विशेषज्ञों ने ब्लीचिंग पाउडर, चूना, जीवसुधा, एलएसएम (LSM) और सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे अनुशंसित कीटाणुनाशकों के उचित उपयोग की जानकारी दी. वैज्ञानिक रोग प्रबंधन अपनाने से कोकून की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की बात कही गयी.
स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार व निजी ग्रेनेज की पहल
क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण रोगमुक्त चकतों (डीएफएल) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण युवाओं को निजी ग्रेनेज शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया. इस पहल से स्थानीय स्तर पर बीज की मांग पूरी होने के साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे. कार्यक्रम के दौरान पायलट प्रोजेक्ट सेंटर के परियोजना सहायक पप्पू कुमार सहित तकनीकी टीम ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया और पारंपरिक खेती को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने की अपील की.
