seraikela kharsawan news: जन्मभूमि पर आज पड़ी है दुश्मन की छाया काली...

केवीपीएसडी उवि सरायकेला प्रांगण में काव्य गोष्ठी में बही कविताओं की धारा

सरायकेला.

सरायकेला स्थित कुंवर विजय प्रताप सिंहदेव राज्य संपोषित बालिका उच्च विद्यालय में भोजपुरी के साहित्यकार नागेंद्र सिंह की जयंती पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. यह आयोजन साहित्यिक संस्था ‘अंगना’ के द्वारा किया गया. इसकी अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक नारायण कुमार ने की. इसमें गायत्री परिवार के राजेश साहू एवं डीएससी राजेश्वर अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने काव्य पाठ किया. साथ ही 11 कवियों ने अपनी कविताएं पढ़ीं. संस्था ने काव्य पाठ करने वाली पांच छात्राओं को सम्मानित किया. संचालन विश्व रंजन त्रिपाठी ने किया. माधवी उपाध्याय की सरस्वती से सम्मेलन की शुरुआत हुई. कवि राजेंद्र शाह राज ने समसामयिक विषय पर कविता के जरिये अपनी भावना व्यक्त की. ‘मां तुम मत रोना, तेरा लाल चला है करने भारत की रखवाली… जन्मभूमि पर आज पड़ी है दुश्मन की छाया काली…’ कवियत्री वीणा पांडे भारती ने बेटियों के प्रति समर्पित अपनी रचना ‘वीणा की मधुर तान, मधुर गान बेटियां, गंगा की स्वच्छ पावन सी धार बेटियां’ पढ़ी. डॉ संध्या सिंह सूफी की प्रस्तुति बच्चों के अंकुरित स्वप्न के ऊपर रही, ‘ ये कागज की कश्ती तुम्हें अब बुलाती, मैं बच्चों के दिल पे मचल लिख रही हूं , कहां जात धर्मों के चक्कर में सूफी/ मैं इंसां पे रब का फ़ज़ल लिख रही हूं. अनामिका मिश्रा ने ‘आगे आज बढ़ी बेटी, काम सारे करे बेटी, कंधों को मिलाकर चली, आज की ये नारियां’ नारियों को प्रेरित करती हुई कविता प्रस्तुत की. माधवी उपाध्याय ने ‘आतंकियों के कहर से थर्राया पहलगाम, गोलियों से भून कर लिये हैं कई जान’ उपासना ने मधुर स्वर में गीत गाया, जो देश के प्रति प्रेम भाव को दर्शाया ‘आओ सुनाती हूं तुम्हें शौर्य गाथा वीर की, हिंद की रक्षा की खातिर शहीद हुए रणवीर की…’ उदय प्रताप सिंह ने गजल प्रस्तुत की ‘आइना लेकर मेरे पास ना आये कोई, अपने चेहरे के ही चेहरों को दिखाये कोई… निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी ने ‘बिछड़े सावन को मैं ढूंढ लाने चली हूं, बारिशों में भीग जाने चली हूं…’ संचालक विश्व रंजन त्रिपाठी की पंक्तियां भी मनमोहक रहीं, ‘बड़ी मिन्नतों से मांगा था उसने अपने उम्मीद के आसमान का एक तारा, पर जिसने दिया क्या उसी की होनी के लिए लिया. कार्यक्रम में मौसमी शुक्ला की पंक्ति ‘मैं नहीं हूं सीता.. प्रभावशाली रहीं. मौके पर कई लोग उपस्थित थे.

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Author: DEVENDRA KUMAR

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