सरायकेला: सरायकेला की समृद्ध छऊ परंपरा और पारंपरिक मुखौटा शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है. सरायकेला के प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पकार एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र को 13 अगस्त को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करेंगी.
वर्ष 2024 और 2025 के लिए आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में देशभर के कुल 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे. राष्ट्रपति 13 अगस्त को सुबह 11.30 बजे आयोजित समारोह में चयनित कलाकारों को सम्मानित करेंगी. इनमें संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कला, कठपुतली, संबद्ध रंगमंच कला और पारंपरिक शिल्प समेत विभिन्न कला विधाओं में उत्कृष्ट एवं दीर्घकालीन योगदान देने वाले कलाकार शामिल हैं.
सरायकेला के पारंपरिक छऊ मुखौटा निर्माण की कला को जीवंत रखने में गुरु सुशांत महापात्र के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना जिले के कला जगत के लिए गौरव का विषय है. वहीं, झारखंड की पारंपरिक नचनी नृत्य परंपरा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने वाली रांची के बुडु की दो सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी को भी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा.
दिल्ली पहुंचे गुरु सुशांत महापात्र, होटल अशोका में हुआ स्वागत
पुरस्कार ग्रहण करने के लिए गुरु सुशांत कुमार महापात्र नयी दिल्ली पहुंच चुके हैं. समारोह से पहले संगीत नाटक अकादमी के सदस्य दीपक जोशी ने होटल अशोका में उनका स्वागत किया. इस दौरान समारोह की तैयारियों और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी भी साझा की गयी.
देशभर के 115 कलाकार होंगे सम्मानित
अलंकरण समारोह में वर्ष 2024 और 2025 के लिए कुल 115 कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा. चयनित कलाकार देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन कलाकारों ने भारतीय संगीत, नृत्य, नाटक, लोक एवं जनजातीय कला, कठपुतली, पारंपरिक रंगमंच समेत विभिन्न कला विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और सचिव राजू दास समेत कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहेंगे.
1952 से कलाकारों को सम्मानित कर रही अकादमी
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार वर्ष 1952 से प्रदान किये जा रहे हैं. यह पुरस्कार भारतीय प्रदर्शन कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के साथ कलाकारों के दीर्घकालीन व्यक्तिगत योगदान को भी मान्यता देता है. अकादमी फेलोशिप के लिए चयनित कलाकारों को तीन लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है, जबकि अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों को ताम्रपत्र, अंगवस्त्रम और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है.
सरायकेला की छऊ परंपरा को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
गुरु सुशांत महापात्र को मिलने वाला यह सम्मान सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि सरायकेला की सदियों पुरानी छऊ परंपरा और पारंपरिक मुखौटा शिल्प के लिए भी बड़ी उपलब्धि है. सरायकेला के पारंपरिक छऊ नृत्य में मुखौटों की विशेष भूमिका होती है. यहां की मुखौटा निर्माण शैली अपनी विशिष्ट कलात्मकता, रंग संयोजन और पारंपरिक तकनीक के लिए अलग पहचान रखती है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों गुरु सुशांत महापात्र का सम्मान सरायकेला की इस लोक एवं पारंपरिक कला को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर और मजबूती से पहचान दिलाएगा.
