Seraikela Kharsawan News : 5 हजार किमी उड़कर पहुंचे परिंदे, चांडिल डैम बना विदेशी पक्षियों का डेरा

प्रवासी पक्षियों की आमद से चांडिल डैम बना सैलानियों की पहली पसंद

खरसावां. सर्दी के मौसम में सरायकेला-खरसावां जिले के जलाशयों में विदेशी पक्षियों के आगमन से क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर उठा है. जिले के पर्यटन स्थल चांडिल डैम की खूबसूरती इन मेहमान परिंदों की मौजूदगी से और बढ़ गयी है. डैम में गूंजती पक्षियों की कलरव सैलानियों का मन मोह रही है. करीब 1,96,300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले चांडिल डैम की शांत लहरों पर इन दिनों प्रवासी पक्षियों और पर्यटकों की रौनक देखते ही बनती है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पानी पर मंडराते और कलरव करते पक्षी बेहद मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं. इन परिंदों की मधुर चहचहाहट और पानी पर तैरते रंग-बिरंगे झुंड पूरे माहौल को जीवंत बना देते हैं. पक्षियों को नजदीक से देखने और कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंच रहे हैं.

29 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होते हैं साइबेरियन सिगल:

चांडिल डैम में आने वाले प्रवासी पक्षियों में साइबेरियन सिगल की संख्या सबसे अधिक है. साइबेरिया के बर्फ से ढके इलाकों से करीब पांच हजार किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर हजारों विदेशी पक्षी यहां पहुंचे हैं. ये पक्षी तजिकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, रूस और मंगोलिया होते हुए भारत आते हैं. ये पक्षी 29 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं.

जिले के अन्य जलाशयों में भी दिखे विदेशी परिंदे

चांडिल डैम के अलावा चौका के पालना डैम, राजनगर के काशिदा डैम, गम्हरिया के सीतारामपुर डैम और कुचाई के केरकेट्टा डैम में भी साइबेरियन पक्षी देखे गये हैं. हालांकि, चांडिल डैम की तुलना में इन जलाशयों में पक्षियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. इस वर्ष चांडिल डैम में साइबेरियन सिगल के अलावा बार-हेडेड गूज, रूफिना (रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड) और यूरोपियन गैडवाल प्रजाति के पक्षी भी पहुंचे हैं. इसके साथ ही लालसर, राजहंस, रंग-बिरंगे बगुले और बधेड़ी जैसे पक्षी भी झुंड बनाकर यहां नजर आ रहे हैं.

बत्तख जैसा दिखता है रूफिना रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड

देशी बत्तख जैसा दिखने वाला रूफिना रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड सर्दियों के मौसम में भारत आने वाला प्रवासी पक्षी है. यह आमतौर पर समूह में रहना पसंद करता है. घोंसला प्रायः घनी वनस्पति या झाड़ियों के नीचे छिपाकर बनाता है. यह पक्षी तैरते हुए डुबकी लगाकर जलीय वनस्पतियों को सतह पर लाकर भोजन करता है. यूरोपियन गैडवाल का भी दिखा अनोखा नजारा: यूरोपियन गैडवाल मुख्य रूप से यूरोप के उत्तरी क्षेत्रों और मध्य उत्तरी अमेरिका में पाये जाते हैं. सर्दियों में ये पक्षी आमतौर पर भारत के दक्षिणी राज्यों की ओर आते हैं, लेकिन इस बार कुछ गैडवाल चांडिल डैम में भी देखे गये.

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By Atul pathak

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