सरायकेला : जर्जर सड़क और जानलेवा गड्ढों के कारण सरायकेला-राजनगर मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन पर लगाया गया ''नो-एंट्री'' का आदेश महज 48 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया. जिला प्रशासन ने 14 सितंबर को संशोधित आदेश जारी करते हुए 12 सितंबर को लागू पूर्व आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही सरायकेला से तितिरबिला, सीनी, सिदमा और मगरकेला होते हुए राजनगर जाने वाले मार्ग पर भारी वाहनों का परिचालन एक बार फिर पूर्ववत शुरू हो गया है. परिवहन विभाग की ओर से नो-इंट्री हटाने संबंधी औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है.
जनआक्रोश के बाद 12 सितंबर को लगी थी रोक
ज्ञात हो कि 12 सितंबर को प्रशासन ने सड़क की खस्ताहाली और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अगले आदेश तक भारी व्यावसायिक वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगायी थी. आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को जान-माल का भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है. स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने भी सड़क पर भारी वाहनों के दबाव को रोकने तथा तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक कदम उठाया गया था.
बारिश में तालाब में तब्दील हो जाती है सड़क
सरायकेला-राजनगर मार्ग की हालत वर्तमान में बद से बदतर हो चुकी है. मार्ग पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है, इसका फर्क कर पाना बेहद मुश्किल है. बारिश के मौसम में इन गड्ढों में जलभराव हो जाने से सड़क कई स्थानों पर तलाब का रूप ले लेती है. इससे सबसे अधिक परेशानी दोपहिया, ऑटो और छोटी कार चालकों को उठानी पड़ती है, जिनके अनियंत्रित होकर पलटने का खतरा लगातार बना रहता है.
जाम से जूझ रहे थे यात्री वाहन
पिछले एक सप्ताह के दौरान इस जर्जर मार्ग पर भारी वाहनों के फंसने से कई बार घंटों लंबा महाजाम लगा. जाम की भयावहता के कारण कई आवश्यक सेवाओं और यात्री बसों को मार्ग बदलकर वैकल्पिक रास्तों से राजनगर आना-जाना पड़ा. नो-इंट्री हटने से भारी मालवाहक वाहनों का परिचालन तो सुचारू हो जाएगा.
