विश्व आदिवासी दिवस पर पेसा कानून रहेगा मुख्य थीम, जागरूकता के लिए होंगे कई कार्यक्रम

विश्व आदिवासी दिवस पर खरसावां में पेसा कानून को लेकर जागरूकता रैली, पैनल डिस्कशन और नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया जाएगा. जानें पूरी जानकारी.

खरसावां: विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों को लेकर कला एवं सांस्कृतिक भवन, खरसावां में आदिवासी समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस का मुख्य थीम पेसा (PESA) कानून रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया. समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा कि झारखंड सरकार द्वारा 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली लागू किए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों और आदिवासी समाज में इसके प्रावधानों की जानकारी सीमित है. ऐसे में इस बार का आयोजन जागरूकता पर केंद्रित रहेगा.

पेसा कानून को लेकर चलेगा जागरूकता अभियान

बैठक में निर्णय लिया गया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य रैली निकाली जाएगी. इसके साथ ही पेसा कानून पर विशेषज्ञों की सहभागिता से पैनल डिस्कशन आयोजित किया जाएगा. ग्रामीणों और युवाओं को सरल भाषा में कानून की जानकारी देने के लिए नुक्कड़ नाटक का भी मंचन होगा. पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम सभा, मुंडा-मानकी व्यवस्था तथा पारंपरिक स्वशासन प्रणाली को मजबूती मिलेगी.

अधिकारों की जानकारी पहुंचाने पर जोर

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून के अधिकारों को धरातल पर उतारने और गांव-गांव तक इसकी जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से जनजागरूकता अभियान के रूप में किया जाएगा. इसके माध्यम से आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों और ग्राम सभा की शक्तियों से अवगत कराया जाएगा. बैठक में मनोज कुमार सोय, सुकरा सोय, रामलाल हेंब्रम, लालसिंह हेंब्रम, टाटा चातर, सालेन सोय, सिद्धेश्वर कुदादा, मीशन सोय, हरिवंश उरांव, विजय दिग्गी, रवी बांकीरा, सोयाम सोय, रघु हांसदा, चांदमनी बोदरा, लोगेन होनहागा सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.


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लेखक के बारे में

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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