सरायकेला. बड़दांड में भाई-बहन संग रथ पर विश्राम कर रहे प्रभु जगन्नाथ शनिवार को गुंडिचा मंदिर यानी अपनी मौसी के घर पहुंच गये. शाम लगभग 3.30 बजे जय जगन्नाथ के उदघोष के साथ भक्तों ने बड़दांड से रथ खींचना शुरू किया. देर शाम को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी पहुंच गये. रथ खींचने के पूर्व बड़दांड में वैदिक मंत्रोच्चार से पूजा-अर्चना करते हुए रथ को मौसीबाड़ी ले जाया गया. मौसीबाड़ी पहुंचने पर भगवान की आरती उतार कर गुंडिचा मंदिर के सिंहासन पर आसीन कराया गया.
दूसरे दिन जैसे ही रथयात्रा प्रारंभ हुई, भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. चहुं ओर “जय जगन्नाथ ” के जयघोष से क्षेत्र गूंज उठा. रथयात्रा के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. रथयात्रा को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला. मान्यता है कि रथयात्रा एकमात्र ऐसा अवसर होता है, जब प्रभु स्वयं भक्तों को दर्शन देने के लिए श्रीमंदिर से बाहर आते हैं. ऐसा माना जाता है कि रथ पर सवार प्रभु जगन्नाथ के दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है. यह यात्रा आस्था की डोर से बंधी होती है, जिसे खींचने के लिए भक्त पूरे वर्ष प्रतीक्षा करते हैं. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को आयोजित होने वाली यह रथयात्रा प्राचीनकाल से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है.दो दिनों में मौसीबाड़ी पहुंचते हैं भगवान जगन्नाथ
सरायकेला में पूरी की तर्ज पर रथयात्रा का आयोजन होता है. यहां प्रभु दो दिनों में मौसीबाड़ी पहुंचते हैं. पहले दिन श्रीमंदिर से निकल कर बीच रास्ते में ही विश्राम करते हैं. दूसरे दिन मौसीबाड़ी पहुचते हैं. यहां नौ दिनों तक रहने के बाद फिर श्रीमंदिर लौट आयेंगे.बड़दांड से लेकर मौसीबाड़ी तक जगह-जगह बनायी गयी रंगोली
रथयात्रा पर श्रीमंदिर से लेकर मौसीबाड़ी तक रास्ते में रंगोली बनायी गयी. श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न प्रकार की रंगोली बनाकर भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
