सरायकेला से शचिंद्र दाश की रिपोर्ट
Mahatma Gandhi Death Anniversary: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ भी जुड़ी हुई हैं. 1937 में गांधी जी ने पहली बार सरायकेला के विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य का दर्शन किया, और इसके अद्भुत प्रस्तुति से बेहद प्रभावित हुए.
कोलकाता में हुआ नृत्य कार्यक्रम
1937 में यह ऐतिहासिक नृत्य प्रदर्शन कोलकाता में शरत चंद्र बोस के निवास पर आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में सरायकेला राजघराने की अगुआई में रॉयल डांस ग्रुप ने भाग लिया. इस अवसर पर राजघराने के कुंअर विजय प्रताप सिंहदेव, राजकुमार सुधेंद्र नारायण सिंहदेव और नाटशेखर बन बिहारी पट्टनायक अपनी टीम के साथ गांधी जी के सामने छऊ नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे.
राधा-कृष्ण नृत्य का प्रभाव
इस नृत्य कार्यक्रम में प्रस्तुत राधा-कृष्ण का नृत्य गांधी जी के लिए विशेष रूप से यादगार रहा. उन्होंने अपने पहले अनुभव में ही कहा था कि नृत्य देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे वृंदावन में खड़े हैं और उनके सामने राधा-कृष्ण का नृत्य चल रहा है. इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि गांधी जी को नृत्य की आत्मा और भावनात्मक गहराई ने कितना प्रभावित किया.
गांधी जी की प्रशंसा
नृत्य के बाद गांधी जी ने सरायकेला राजघराने और उनके डांस ग्रुप की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत उदाहरण बताया और कहा कि यह नृत्य न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि भारतीय परंपरा और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है.
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सांस्कृतिक विरासत और महत्त्व
सरायकेला का छऊ नृत्य आज भी विश्व प्रसिद्ध है और इसे भारतीय नृत्य कला की अमूल्य धरोहर माना जाता है. गांधी जी के इस अनुभव ने यह संदेश भी दिया कि भारतीय संस्कृति की गहराई को सिर्फ पढ़ाई या किताबों से नहीं, बल्कि कला और प्रदर्शन के माध्यम से भी समझा जा सकता है.
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