seraikela kharsawan news: भाषा-साहित्य व संस्कृति के उत्थान के लिए आजीवन समर्पित रहे मधु बाबू : सुमंत मोहंती

आजीवन भाषा व साहित्य के लिए समर्पित रहे मधुबाबू

खरसावां. उत्कल सम्मिलनी की सरायकेला- खरसावां जिला समिति एवं ओड़िया शिक्षक संघ की ओर से खरसावां के कुम्हार साही सामुदायिक भवन सभागार में सोमवार को उत्कल गौरव मधुसूदन दास की 178वीं जयंती मनायी गयी. मौके पर ओडिया समुदाय के लोगों ने उत्कल गौरव मधुसूदन दास के बताये मार्ग पर चलकर भाषा, साहित्य व संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लिया. उत्कल सम्मिलनी के जिलाध्यक्ष सुमंत चंद्र मोहंती ने कहा कि मधुसूदन दास के प्रयास से ही 1903 में उत्कल सम्मिलनी का गठन हुआ था. एक अप्रैल 1936 में स्वतंत्र ओडिशा प्रदेश के गठन से लेकर ओडिया भाषा, साहित्य व संस्कृति के उत्थान में मधुसूदन दास ने अहम भूमिका निभायी. स्व दास उत्कल सभा, उत्कल सम्मिलनी, उत्कल साहित्य समाज समेत विभिन्न संगठनों से जुडे हुए थे. मधुसूदन दास आजीवन भाषा-साहित्य व संस्कृति के उत्थान को समर्पित थे.

ओडिया भाषा- साहित्य को सशक्त बनाना ही मधुसूदन दास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि :

जिला परिदर्शक सुशील षाड़ंगी ने कहा कि ओडिया भाषा साहित्य को जन-जन तक पहुंचाना और इसे सशक्त बनाना ही मधुसूदन दास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. जिला उपाध्यक्ष बिरोजा पति ने भी मधुसूदन दास के योगदान को याद किया. इस अवसर पर अजय प्रधान, सपन मंडल, राजू मंडल, जयजीत षाड़ंगी, चंद्रभानु प्रधान, रंजीत मंडल, भारत चंद्र मिश्रा, पुष्पा पुष्टि, शिव चरण महतो आदि मौजूद थे.

मधु बाबू के कृतित्व को याद करने की जरूरत:

सरायकेला जिला मुख्यालय स्थित एसएनइएम स्कूल भवन में मधु बाबू की जयंती पर उत्कल गौरव मधुसूदन दास विचार मंच की ओर से ओडिया भाषा संस्कृति एवं आर्थिक विकास विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. डॉ अतुल सरदार की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता प्रो. मनोज महापात्र( काशी साहू कॉलेज सरायकेला) ने उत्कल गौरव की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मधु बाबू ने ओडिया भाषा-संस्कृति के प्रति स्वाभिमान एवं आर्थिक समृद्धि के लिए स्वावलंबन की सीख दी है. उत्कल गौरव मधु बाबू के कृतित्व से प्रेरणा लेने का दिन है. कहा कि स्वावलंबन के लिए ऑर्गेनिक खेती समय की मांग है. डॉ अतुल सरदार ने उत्कल गौरव मधु बाबू की जयंती पर प्रकाश डाला. उन्होंने ओडिया जाति के एकीकरण, भाषा संस्कृति व आर्थिक विकास के लिए संघर्ष किया. साहित्यकार विष्णुपद सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान में उत्कल गौरव मधुबाबू की कृतित्व को याद करने की दिन है. उन्होंने भाषा-संस्कृति के प्रति स्वाभिमान एवं आर्थिक स्वावलंबन की सीख दी थी. इन सभी बातों को लेकर ओडिया भाषा-संस्कृति एवं आर्थिक विकास विषयक सेमिनार आयोजित हुई. सेमिनार में वक्ताओं ने स्वावलंबी बनने, आपसी सामाजिक सहयोग पर बल दिया. मौके पर अजीत राउत, प्रदीप सिंहदेव, शिक्षका लिलि प्रभा दास, मीता कवि आदि उपस्थित थे.

उत्कलमणि आदर्श पाठागार में उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जयंती मनी

: सरायकेला के उत्कलमणि आदर्श पाठागार में उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जयंती मनायी गयी. पाठागार के नाट्य भवन में उत्कल गौरव मधुसूदन दास व उत्कलमणि गोपबंधु दास के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी. साथ ही ओडिया भाषा-संस्कृति एवं परंपरा को कायम रखने का संकल्प लिया गया. ओडिया के ख्यातिप्राप्त लेखक विष्णुपद सिंहदेव, सेवानिवृत्त शिक्षक सह लेखक प्रदीप नारायण सिंहदेव, उत्कल सम्मेलनी कबी अजीत कुमार राउत, हलदर दास, काशीनाथ कर, तरुण भोल, जलेश कवि समेत अन्य सदस्यों ने उत्कल गौरव मधुसूदन दास के जीवनी पर प्रकाश डाला. स्वतंत्रता संग्राम से लेकर ओडिशा प्रांत के गठन में उनके योगदान को याद किया गया. ओडिया समुदाय के सभी लोगों ने उत्कल गौरव मधु बाबू के बताये मार्ग पर चलकर भाषा, साहित्य व संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लिया. इस दौरान पाठागार के गायक चंद्रशेखर कर ने वंदे उत्कल जननी… प्रस्तुत किया. मौके पर पाठागार के आशुतोष कर, दाशरथ परीक्षा, समर महंती, दीपक दारोगा, लिपू महंती, पवन कवि, चक्रधर मोहंती उपस्थित थे.

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Author: DEVENDRA KUMAR

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