Seraikela Kharsawan News : धान खरीद का लक्ष्य 3 लाख क्विंटल आज से तीन केंद्रों पर होगी खरीद

किसानों को 48 घंटे से लेकर सात दिनों के अंदर एकमुश्त राशि का भुगतान होगा

खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के लिए तीन लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस बार जिले के 27 लैंपसों (लार्ज एरिया मल्टीपरपज सोसाइटी) में धान की खरीद की जायेगी. धान अधिप्राप्ति की शुरुआत 15 दिसंबर (सोमवार) को तीन लैंपस- सरायकेला, खरसावां और चांडिल के भादुडीह स्थित लैंपस से होगी. इन तीनों केंद्रों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा. इसके साथ ही अन्य लैंपसों में भी धीरे-धीरे खरीद प्रक्रिया आरंभ की जायेगी. धान खरीद केंद्रों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.

4500 से अधिक किसानों ने कराया निबंधन :

धान खरीद के लिए अब तक जिले के करीब 4,500 से अधिक किसानों ने निबंधन कराया है और पंजीकरण की प्रक्रिया अब भी जारी है. धान के भंडारण के लिए सभी गोदामों को दुरुस्त किया गया है. खरसावां लैंपस में 500 मीट्रिक टन क्षमता का नया गोदाम भी बनाया गया है.

इस बार एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था :

धान खरीद की दर इस वर्ष 2450 रुपये प्रति क्विंटल तय की गयी है. जबकि पिछले वर्ष यह 2400 रुपये प्रति क्विंटल थी. सरकार ने इस बार किसानों को एकमुश्त राशि भुगतान का प्रावधान किया है. खरीद के बाद किसानों को 48 घंटे से सात दिनों के भीतर राशि उनके खाते में भेजी जायेगी. किसानों को खरीद संबंधी जानकारी एसएमएस के माध्यम से दी जा रही है.

पिछले वर्ष लक्ष्य से कम हो पायी थी खरीद

खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में जिले को शुरू में तीन लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे बाद में घटाकर 1.95 लाख क्विंटल कर दिया गया. हालांकि, संशोधित लक्ष्य का भी केवल 43.14 प्रतिशत ही हासिल हो सका. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस वर्ष 4321 निबंधित किसानों में से केवल 1443 किसानों ने ही लैंपसों में धान बेचा था, जिसके तहत 81,133.33 क्विंटल धान की खरीद हो पायी.

लगातार तीन वर्षों से लक्ष्य से दूर रही खरीद :

जिले में पिछले तीन वर्षों से धान खरीद लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पायी. वर्ष 2022-23 और 2023-24 में मौसम की अनुकूलता न होने से उत्पादन घटा, वहीं धान खरीद प्रणाली की जटिलता और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं के कारण भी किसानों ने लैंपसों में धान बेचने से परहेज़ किया.

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Author: ATUL PATHAK

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