अब गांव में ही मशीन से प्लेट-दोना बनाएंगी महिलाएं, 50 स्वयं सहायता समूह की सदस्यों को मिला प्रशिक्षण

राजनगर के कुमडीह गांव में ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल हुई है. 50 महिलाओं को पेपर प्लेट और दोना बनाने का प्रशिक्षण देकर मशीनें उपलब्ध कराई गईं. इससे अब वे गांव में ही अपनी आजीविका बढ़ा सकेंगी.

राजनगर : ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में कुमडीह गांव में एक नई पहल शुरू हुई है. राजनगर प्रखंड की बीजाडीह पंचायत के कुमडीह गांव में झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (जेटीडीएस), डीपीएमयू सरायकेला-खरसावां की ओर से नाबार्ड पोषित लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम (एलईडीपी) के तहत आयोजित 10 दिवसीय कौशल उन्नयन प्रशिक्षण सोमवार को संपन्न हुआ. प्रशिक्षण के बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को डबल डाई सेमी-ऑटोमेटिक पेपर प्लेट मशीन उपलब्ध करायी गयी. अब महिलाएं गांव में ही पेपर प्लेट और दोना का उत्पादन कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ा सकेंगी.

मशीन चलाने से लेकर बाजार तक की मिली जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को केवल पेपर प्लेट और दोना बनाने की तकनीक ही नहीं सिखायी गयी, बल्कि मशीन के संचालन, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने, पैकेजिंग और बाजार से जुड़ाव की जानकारी भी दी गयी। इससे प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को उत्पादन शुरू करने के साथ अपने तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. महिलाओं को दी गयी मशीन के साथ 12, 8 और 6 इंच की डाई भी उपलब्ध करायी गयी है. इनके माध्यम से अलग-अलग आकार के पेपर प्लेट और दोना तैयार किए जा सकेंगे.

दो चरणों में हुआ प्रशिक्षण

10 दिवसीय प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित किया गया. पहला चरण 7 से 14 सितंबर तक तथा दूसरा चरण 20 से 21 सितंबर तक चला. प्रथम बैच में पांच स्वयं सहायता समूहों की 50 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. मशीन उपलब्ध होने के बाद अब महिलाएं प्रशिक्षण में सीखी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उत्पादन शुरू कर सकेंगी.

जून में शुरू हुई थी इकाई

बताया गया कि 17 जून 2026 को इसी इकाई में नाबार्ड के सहयोग से दो पेपर प्लेट निर्माण मशीनों का शुभारंभ किया गया था. अब प्रशिक्षण और मशीन उपलब्ध होने के बाद महिलाओं के लिए उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आसान होगा. परियोजना से करीब 150 महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलने की संभावना जतायी गयी है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर भी मजबूत होने की उम्मीद है. मौके पर जेटीडीएस सरायकेला-खरसावां के डीपीएम नीरज नयन समेत संबंधित पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे.

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By Surendra mardi

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