शचिंद्र कुमार दाश/उत्तम सोनार
Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया के रामचंद्रपुर मैदान में श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के 138वें जन्म वर्ष के अवसर पर आयोजित कृष्टि दीपा महोत्सव में झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा सहित विभिन्न राज्यों से करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजन समिति की ओर से भरपूर प्रबंध किए गए थे. देवघर स्थित सत्संग आश्रम के प्रशासक बिंकी दा ने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन को सदाचार, प्रेम और भक्ति से जोड़ता है, तब उसका जीवन सार्थक बनता है. उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने जीवन और आचरण को सही दिशा में ढाल ले, तो वह वास्तविक सुख और शांति का अनुभव कर सकता है.
मानव जीवन ईश्वर का अमूल्य अवसर
सत्संग आश्रम के प्रशासक बिंकी दा ने कहा कि मनुष्य जीवन ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य अवसर है. इसका उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि सच्चे आनंद और आत्मिक उन्नति की प्राप्ति होना चाहिए. मानव जीवन का प्रमुख कर्तव्य है कि वह अपने व्यवहार, कर्म और सेवा भाव के माध्यम से प्रभु को तृप्त करने का प्रयास करे. मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष शंभू नाथ बोस, सचिव अरुण कुमार मन्ना, सह अध्यक्ष सुबोध पोद्दार, सह सचिव नंदलाल महतो, प्रशांत कुमार, संजू दा, भास्कर शरण, मुकेश महतो, रविशंकर बनर्जी, सुभाष मजुमदार, सजल घोष, विश्वजीत बेरा समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.
सेवा और सदाचार का संदेश देता है कृष्टि दीपा महोत्सव : अर्जुन मुंडा
अनुष्ठान में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, उनकी पत्नी मीरा मुंडा, आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार, झामुमो नेता गणेश माहली समेत विभिन्न दलों के नेता उपस्थित हुए. मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कृष्टि-दीपा महोत्सव सत्संग परंपरा का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो मानव जीवन में सेवा, सदाचार, समन्वय और आध्यात्मिक जागरण की भावना को प्रज्ज्वलित करने का संदेश देता है.
सुबह नहवत और उषा कीर्तन से शुरुआत
महोत्सव की शुरुआत प्रातः 4:30 बजे नहवत और उषा कीर्तन से हुई. इसके बाद प्रातः कालीन विनती प्रार्थना एवं अमिय ग्रंथादि पाठ किया गया. सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक संगीतांजलि एवं इष्ट प्रसंग का कार्यक्रम आयोजित हुआ. दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारा के बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें आध्यात्मिक प्रवचन और विचार-विमर्श हुए. कार्यक्रम का समापन संध्या 5:56 बजे संध्याकालीन विनती प्रार्थना एवं अमिय ग्रंथादि पाठ के साथ हुआ. महोत्सव में करीब 250 युवा वोलेंटियर व्यवस्था में लगे रहे. श्रद्धालुओं के लिए भव्य मंच, भोजन वितरण स्थल, बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा सहायता तथा प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाये गये थे. इस कार्यक्रम में सरायकेला खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिम सिंहभूम जिले के लोग मुख्य रूप से शामिल हुए.
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