खरसावां में पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन, गायत्री मंत्रों से गूंजा बड़ाबांबो

Kharsawan News: खरसावां के बड़ाबांबो में पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ भव्य रूप से संपन्न हुआ. गायत्री मंत्र जाप और हवन-पूजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहा. नारी शक्ति, संस्कार और भारतीय संस्कृति पर विशेष जोर दिया गया. कार्यक्रम में कई धार्मिक अनुष्ठान और दीक्षा संस्कार भी आयोजित किए गए. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Kharsawan News: झारखंड में खरसावां के बड़ाबांबो स्थित हुडीबाबा शिव मंदिर परिसर में आयोजित दो दिवसीय नारी शक्ति संवर्धन पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ. इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना रहा और गायत्री मंत्रों के उच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया.

हवन-पूजन और दीप यज्ञ का आयोजन

मंगलवार को श्रद्धालुओं ने वेदमाता गायत्री का आह्वान करते हुए पांच कुंडों में विधिवत हवन-पूजन किया. यज्ञ के दौरान दीप यज्ञ का भी आयोजन हुआ, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. देर शाम विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति दी गई, जिससे पूरे आयोजन का समापन हुआ. इस दौरान अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला.

दीक्षा संस्कार और 16 संस्कारों की दी गई जानकारी

महायज्ञ के दौरान 19 श्रद्धालुओं का गायत्री मंत्र दीक्षा संस्कार कराया गया. साथ ही 16 संस्कारों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया. कार्यक्रम में दो बच्चों का नामकरण संस्कार, एक पुंशवन संस्कार और दो माताओं का गर्भधारण संस्कार भी संपन्न कराया गया. इन संस्कारों के माध्यम से भारतीय परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखने का संदेश दिया गया.

संस्कारों से ही होता है समाज का निर्माण

शांतिकुंज (हरिद्वार) के प्रतिनिधि संतोष संगम ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छे संस्कारों से ही एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है. उन्होंने चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि सदविचारों को आचरण में उतारना ही सच्चा चरित्र है. एक चरित्रवान व्यक्ति समाज में हर प्रकार से सम्मानित होता है.

गायत्री मंत्र के महत्व पर दिया गया विशेष जोर

संतोष संगम ने गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मंत्र जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान प्रदान करता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन गायत्री महामंत्र का जाप करने की अपील की. साथ ही साधना, स्वाध्याय और शिक्षा के माध्यम से आत्मविकास पर बल दिया गया.

भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को अपनाने की अपील

कार्यक्रम में ‘गौ, गंगा, गीता, गायत्री और गुरु तत्व’ को भारतीय संस्कृति के प्रमुख आधार स्तंभ बताते हुए उन्हें जीवन में अपनाने की अपील की गई. वक्ताओं ने कहा कि इन मूल्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार से समाज को सही दिशा मिल सकती है. यज्ञ और संस्कारों के माध्यम से लोगों को नैतिकता और सदाचार की ओर प्रेरित किया गया.

नारी शक्ति के महत्व पर दिया गया संदेश

नारी शक्ति संवर्धन पर विशेष जोर देते हुए बताया गया कि महिलाएं परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. यदि नारी सशक्त होगी तो समाज स्वतः मजबूत होगा. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया.

आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम

पूरे महायज्ञ के दौरान आस्था और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला. सामूहिक गायत्री मंत्र जाप से पूरा बड़ाबांबो क्षेत्र गूंज उठा. कार्यक्रम स्थल पर वेदमाता गायत्री और भारत माता की तस्वीरों ने श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का भाव और बढ़ा दिया.

कई गणमान्य लोग हुए शामिल

इस आयोजन में शांतिकुंज हरिद्वार के वरिष्ठ प्रतिनिधि संतोष संगम, गायत्री परिवार के शंभुनाथ अग्रवाल, बसंती दीदी, चतुर्थी देवी, नरहरी प्रमाणिक, तिलक महतो, रामचंद्र मुखी, अजीत प्रधान, सुमित्रा देवी, सत्यवती महतो, अनिता महतो, सुनिता महतो, चक्रधर महतो, महाराज महतो और पद्मलोचन महतो समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए.

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धार्मिक आयोजन से मिला सामाजिक संदेश

इस महायज्ञ के माध्यम से केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश भी दिया गया. संस्कार, सदाचार और नैतिक मूल्यों को अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा दी गई. आयोजन के सफल समापन के साथ श्रद्धालु अपने-अपने घरों को आध्यात्मिक ऊर्जा और नए संकल्प के साथ लौटे.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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