खरसावां छऊ गुरु और शिक्षाविद कामाख्या प्रसाद षड़ंगी का निधन, शोक में कला जगत

खरसावां के प्रसिद्ध छऊ गुरु, नाट्य निर्देशक और शिक्षाविद कामाख्या प्रसाद षड़ंगी का 86 वर्ष की आयु में निधन, क्षेत्र में शोक की लहर.

खरसावां: खरसावां शैली के प्रख्यात छऊ गुरु, नाट्य निर्देशक और शिक्षाविद कामाख्या प्रसाद षड़ंगी का रविवार की सुबह जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल में निधन हो गया. वे करीब 86 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे.

उनके निधन की खबर मिलते ही खरसावां सहित पूरे झारखंड के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गयी. बहुमुखी प्रतिभा के धनी गुरु षड़ंगी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार और कला प्रेमियों का एक बड़ा संसार छोड़ गये हैं. बड़ी संख्या में लोगों ने उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की.

राजकीय उच्च विद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य

विशेष मुद्रा में डेमोस्ट्रेशन देते गुरु कामाख्या प्रसाद षड़ंगी

शिक्षा, समाज, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है. खरसावां के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य रहे गुरु षड़ंगी ने विद्यालय में उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई.

उनसे शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आज देश-विदेश में बड़े पदों पर कार्यरत हैं. शिक्षा के साथ वे सामाजिक कार्यों में भी उतनी ही सक्रियता से जुड़े रहे. वे खरसावां की ऐतिहासिक बासंती मंदिर पूजा समिति में लंबे समय तक सचिव रहे और उत्कल सम्मिलनी की जिला समिति के सलाहकार का दायित्व भी संभाला.

70 से अधिक नाटकों के थे निर्देशक

भाषा, साहित्य और रंगमंच के मझे हुए साधक गुरु षड़ंगी ने खरसावां शैली के छऊ नृत्य को नई ऊंचाइयां दीं. वे एक कुशल कोरियोग्राफर और निर्देशक थे, जिन्होंने छऊ के लिए कई नई नृत्य तालों की रचना की.

इसके अलावा, महावीर संघ ओपेरा के माध्यम से उन्होंने 70 से अधिक ओड़िया नाटकों का सफल निर्देशन किया और कई नाटकों में अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी. उनके जाने से खरसावां ने छऊ, रंगमंच और शिक्षा जगत का एक अमूल्य रत्न हमेशा के लिए खो दिया है.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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