जावा उठाने के साथ उदालखाम में करम पर्व शुरू, मांदर की थाप पर थिरकेंगे ग्रामीण

खरसावां के उदालखाम गांव में तीन दिवसीय करम पर्व का शुभारंभ पारंपरिक जावा रस्म के साथ हुआ. इस दौरान कुड़माली गीतों पर सामूहिक नृत्य और ढोल-मांदल की थाप पर लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई. यह पर्व प्रकृति और कृषि जीवन का प्रतीक है.

खरसावां : खरसावां प्रखंड के उदालखाम गांव में सोमवार को जावा उठाने की पारंपरिक रस्म के साथ तीन दिवसीय करम पर्व का शुभारंभ हुआ. पर्व को लेकर पूरे गांव में उत्साह और उल्लास का माहौल है. गांव की पांच जावा दलों की बालिकाओं ने सुरजुड़िया एवं संखुवा नदी के तट पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और जावा उठाया. इस दौरान बालिकाओं ने कुड़माली भाषा में पारंपरिक जावा गीतों की प्रस्तुति दी और सामूहिक नृत्य कर नदी तट से लेकर गांव तक के वातावरण को उत्सवमय बना दिया.

22 सितंबर को होगी करम पूजा, रातभर झूमेंगे ग्रामीण

मंगलवार, 22 सितंबर को करम डाली और करम पेड़ के समीप जावा स्थापित कर विधि-विधान से करम पूजा संपन्न करायी जायेगी. इस दौरान ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना करेंगे. पूजा के उपरांत रातभर डोल, मांदल और नगाड़े की थाप पर पारंपरिक लोकगीतों व सामूहिक नृत्य का दौर चलेगा, जिसमें युवा, बुजुर्ग और बालिकाएं उत्साहपूर्वक भाग लेंगे.

23 सितंबर को विदाई गीतों के साथ होगा विसर्जन

तीन दिवसीय इस लोकपर्व का समापन बुधवार, 23 सितंबर को करम डाली के विसर्जन के साथ होगा. ग्रामीण पारंपरिक विदाई गीत गाते हुए करम डाली को विसर्जन स्थल तक ले जाएंगे. प्रकृति, कृषि जीवन और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक यह पर्व ग्रामीण क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और सहभागिता को जीवंत बनाए हुए है.

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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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