Seraikela Kharsawan News : श्रद्धा के दीप व परंपरा की ज्योति से जगमगायेगी कलानगरी

सरायकेला-खरसावां जिले में मां काली की पूजा 20 अक्तूबर की रात से आरंभ होगी.

सरायकेला/खरसावां.

सरायकेला-खरसावां जिले में मां काली की पूजा 20 अक्तूबर की रात से आरंभ होगी. कहीं तीन दिन तो कहीं सात दिनों तक चलने वाली पूजा को लेकर लोगों में भारी उत्साह है. खरसावां के पदमपुर, सरकारी काली मंदिर, पांचगछिया, बडाबांबो, बुढ़ीतोपा, आमदा और सरायकेला के सीनी, महालीमुरुप, कीता, बाजार क्षेत्र में मां काली की आराधना की जायेगी. मंदिरों की सजावट पूरी कर ली गयी है. कुछ स्थानों पर तांत्रिक विधि तो कहीं वैष्णव परंपरा से पूजा संपन्न होगी.

खरसावां के पदमपुर में 21 से 26 अक्तूबर तक होगा मेला का आयोजन

खरसावां के पदमपुर गांव में 20 अक्तूबर की रात से मां काली की पूजा शुरू होगी. इसके अगले दिन 21 से 26 अक्तूबर तक पूजा सह मेला का आयोजन किया जायेगा. करीब 128 सालों से जारी यह परंपरा इस बार भी धूमधाम से मनायी जायेगी. कोल्हान क्षेत्र के साथ ओडिशा और बंगाल से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे. सात दिनों तक चलने वाले मेले में नाव झूला, ड्रगन झूला, चांद-तारा झूला, ब्रेज डांस झूला और थ्री-डी झूला जैसे झूले लगेंगे. ओडिशा की नाट्य संस्थाएं ओडिया नाटकों का प्रदर्शन करेंगी और दर्जनों दुकानें सजेंगी. कलिंग शैली में निर्मित पदमपुर का काली मंदिर दीवारों पर उकेरी मूर्तियों और कलाकृतियों से दर्शकों को आकर्षित कर रहा है.

सीनी में 130 वर्षों से हो रही है मां काली की पूजा, दक्षिण भारतीय शैली में बना भव्य मंदिर

रेल नगरी सीनी में मां काली की पूजा का 130 वर्ष पुराना इतिहास है. राजपरिवार के जितेंद्र सिंहदेव और ईश्वर प्रसाद सिंहदेव ने इसकी शुरुआत सीनी डाकघर के पास फूस के घर से की थी. वर्ष 1907 में हाट मैदान में पूजा आरंभ हुई और 2016 में भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. दक्षिण भारतीय शैली में बने इस मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा होती है. मां काली के प्रति क्षेत्र में गहरी आस्था है. मंदिर में रोज आरती होती है और 2060 तक मूर्ति की अग्रिम बुकिंग हो चुकी है. काली पूजा पर पूरा शहर और मंदिर परिसर दुधिया रोशनी में नहायेगा.

सरकारी काली मंदिर

तांत्रिक विधि से होगी पूजा, सरकार 67 हजार रुपये खर्च करेगी : खरसावां के सरकारी काली मंदिर में मां काली की पूजा तीन सदियों से निष्ठा और परंपरा के साथ की जा रही है. राजा-राजवाड़े के दौर से चली आ रही यह पूजा आज भी उसी सादगी और श्रद्धा के साथ संपन्न होती है. पूजा के दौरान रियासत कालीन परंपराओं का पालन किया जाता है. तांत्रिक विधि-विधान से होने वाली इस पूजा की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार की होती है. इस बार पूजा आयोजन पर लगभग 67 हजार रुपये सरकारी फंड से खर्च किये जायेंगे. सात दिनों तक चलने वाली यह पूजा श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है.

बड़ाबांबो में 1975 से हो रही मां की आराधना

बड़ाबांबो में मां श्यामा काली की पूजा वर्ष 1975 से आरंभ हुई थी. रेलवे स्टेशन के सामने स्थित मंदिर में इस वर्ष चार नवंबर को भक्ति भाव से पूजा की जायेगी. इसकी तैयारी जोरों पर है. सबसे पहले रेलवे कर्मियों ने स्टेशन परिसर में प्रतिमा स्थापित कर पूजा प्रारंभ की थी. तब से यह परंपरा निरंतर जारी है.

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Author: AKASH

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