अब तसर से गांव में ही कमाई का रास्ता, किसानों को सिखाई गयी आधुनिक तकनीक

केंद्रीय रेशम बोर्ड ने ईचागढ़ और चांडिल में तसर कीटपालन के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया। जानें कैसे बढ़ रही है किसानों की आय।

खरसावां : तसर रेशम कीटपालन को नये क्षेत्रों में विस्तार देने और किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर इसे टिकाऊ स्वरोजगार का माध्यम बनाने की पहल शुरू की गयी है. केंद्रीय रेशम बोर्ड के बुनियादी बीज गुणक और प्रशिक्षण केंद्र (BSMTC), खरसावां की ओर से ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत ईचागढ़ के जिलिंगागर गांव में जागरूकता कार्यक्रम और चांडिल प्रखंड के बाशाहातु गांव में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन आयोजित किया गया.

35 किसानों को तसर कीटपालन की दी जानकारी

जिलिंगागर में आयोजित कार्यक्रम में 35 नये किसानों को तसर कीटपालन की बुनियादी जानकारी दी गयी. किसानों को तसर रेशमकीट पालन के वैज्ञानिक तरीके, इसकी आर्थिक संभावनाओं तथा अर्जुन और आसन वृक्षों के प्रबंधन की जानकारी दी गयी. साथ ही केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से किसानों को मिलने वाली तकनीकी और संस्थागत सहायता के बारे में बताया गया. किसानों को तसर कीटपालन को अतिरिक्त आय के साथ टिकाऊ स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया.

कीटों से रक्षा के लिए लगाया नेट.

तकनीक का किया जीवंत प्रदर्शन

वहीं, दोपहर में बासाहातु गांव के खेतों में किसानों को तसर कीटों की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया. शुरुआती अवस्था के रेशमकीट यानी चावकी को परभक्षियों और प्रतिकूल मौसम से बचाने के लिए नेट के नीचे चावकी कीटपालन की तकनीक का जीवंत प्रदर्शन किया गया.

रोगों से बचाव के उपायों की दी जानकारी

इसके अलावा कीटपालन स्थल की स्वच्छता, वैज्ञानिक प्रबंधन और रोगों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गयी. किसानों को पेब्रिन और फ्लैचरी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए विसंक्रमक जीवनसुधा और एलएसएम के सही उपयोग तथा छिड़काव की व्यावहारिक जानकारी दी गयी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >