सरायकेला-खरसावां में दिखा कृषि और आस्था का अनूठा संगम, हर्षोल्लास संग मना गोम्हा पर्व

सरायकेला-खरसावां में गोम्हा पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया. घरों में बलराम पूजा और कृषि संस्कृति की झलक दिखी. हुई विशेष पूजा-अर्चना.

खरसावां: श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर सरायकेला-खरसावां जिले में ओड़िया समुदाय का पारंपरिक गोम्हा पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. खरसावां और सरायकेला के विभिन्न गांवों में घर-घर भगवान बलराम की पूजा-अर्चना की गई. कृषि परंपरा से जुड़े इस पर्व को लेकर सुबह से ही घरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई थीं, जहां महिलाओं ने दीवारों पर मनमोहक चित्र उकेरकर विधि-विधान से पूजा की.

दीवारों पर उकेरी गई कृषि संस्कृति की अनूठी झलक

गोम्हा पर्व पर घरों में पूजा अर्चना करती महिलाएं

गोम्हा पर्व की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की अनूठी परंपरा है. इस दिन घरों की दीवारों पर भगवान बलराम के साथ हल, जोड़ा बैल और गाय-बछड़े के चित्र बनाए जाते हैं, जो कृषि प्रधान समाज के महत्व को दर्शाते हैं. पूजा के बाद मंडा, काकरा, मालपुआ और पीठा जैसे पारंपरिक ओड़िया व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया गया. किसान इस दिन अच्छी फसल और पशुधन की समृद्धि की कामना करते हैं.

हरिभंजा मंदिर में मना बलदेव जन्मोत्सव

श्रावण पूर्णिमा के मौके पर खरसावां के हरिभंजा स्थित जगन्नाथ मंदिर में बलदेव जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया. सुबह सूर्य पूजा के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और पारंपरिक उलुध्वनि के बीच विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियों का मनमोहक श्रृंगार कर आरती उतारी गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा.

पकवानों के उत्सव से पीढ़ी-दर-पीढ़ी जुड़ रही विरासत

गोम्हा पूर्णिमा के अगले दिन विशेष पकवान बनाने और सामूहिक रूप से इसका आनंद लेने की परंपरा है. इस दिन घरों में तैयार होने वाले लजीज पारंपरिक व्यंजन आपसी सौहार्द को बढ़ाते हैं. इन आयोजनों के जरिए नयी पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और कृषि विरासत से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास किया जा रहा है, जो आज भी ओड़िया समाज में पूरी जीवंतता के साथ कायम है.



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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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