सरायकेला. सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष खेती का बेहतर माहौल दिख रहा है. मई महीने से मौसम मेहरबान है. किसान उत्साहित हैं. किसान अक्षय तृतीया से खेती कार्य में जुट गये हैं. सरायकेला-खरसावां जिला में खरीफ की खेती बारिश पर निर्भर है. जिले में सिंचाई व्यवस्था की कमी है. विगत पांच वर्षों में पहली बार मई महीने (21 मई तक) में सामान्य से अधिक बारिश हुई है. किसान अभी से खेतों में हल चलाने लगे हैं. कहीं-कहीं निचली जमीन पर बुआई शुरू हो गयी है.
किसानों का कहना है कि बारिश की यही रफ्तार रही, तो इस वर्ष उपज सोलह आना प्राप्त होगा. खरीफ की खेती जैसे मक्का, तिलहन, दलहन की पैदावार अच्छी होगी.जिले में छींटा विधि से धान की खेती करते हैं अधिकतर किसान
सरायकेला-खरसावां जिला में अधिकतर किसान छींटा विधि से धान की खेती करते हैं. किसान धान की खेती की तैयारी अक्षय तृतीया से शुरू करते हैं. वहीं, रोजो संक्रांति तक खत्म कर देते हैं. जिला कृषि विभाग ने जिले में एक लाख हेक्टेयर भू-भाग पर धान की खेती करने का लक्ष्य रखा है.
राजनगर का वर्षामापी यंत्र एक वर्ष से खराब:
जिले के राजनगर प्रखंड का वर्षामापी यंत्र एक वर्ष से खराब है. इसे ठीक नहीं किया जा सका है. राजनगर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने दो अप्रैल 2024 को अवगत कराया कि वर्षामापी यंत्र आकाशीय बिजली से क्षतिग्रस्त हो गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
