Seraikela Kharsawan News : हाथी ने ग्राम प्रधान का घर तोड़ा मलबे में दबने से महिला घायल

वन विभाग से सुरक्षा के लिए पटाखा और टॉर्च देने की गुहार

सरायकेला/चांडिल . सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है. बीती रात कुकड़ू प्रखंड की ईचाडीह पंचायत के आदरडीह चौका गांव में हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी ने गांव के ग्राम प्रधान गुरुपदो गोप के घर को निशाना बनाया और उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. इस घटना में ग्राम प्रधान की पत्नी मलबे की चपेट में आने से घायल हो गयी है.

दीवार ढहते ही सुरक्षित स्थान की ओर भागा परिवार:

मिली जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग 10:30 बजे एक विशालकाय गजराज जंगल से निकलकर गांव में दाखिल हुआ. हाथी ने सबसे पहले गुरुपदो गोप के घर का दरवाजा तोड़ दिया. आहट मिलते ही घर में सो रहे सदस्य सतर्क हो गए. इसके बाद हाथी ने घर के दूसरी तरफ की दीवार को जोरदार टक्कर मारकर ढहा दिया और अंदर रखा अनाज व अन्य सामान तहस-नहस कर दिया. घटना के वक्त घर में ग्राम प्रधान के अलावा उनकी पत्नी, विवाहित बेटी और दो छोटे बच्चे मौजूद थे. जैसे ही दीवार गिरी परिवार के सदस्य सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत घर से बाहर की ओर भागकर अपनी जान बचायी. हालांकि, दीवार गिरने के कारण ग्राम प्रधान की पत्नी के छाती और पैर में गंभीर चोटें आयी हैं. ग्रामीणों ने वन विभाग से घायल महिला के समुचित इलाज और मुआवजे की मांग की है.

तीन माह में 4 की मौत, दो दर्जन घर ध्वस्त

ईचागढ़ और कुकड़ू प्रखंड में पिछले तीन महीनों से हाथियों का उत्पात चरम पर है. आंकड़ों पर गौर करें तो इस छोटी सी अवधि में हाथियों के हमले से 4 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं. गजराज अब तक दो दर्जन से अधिक घरों को क्षतिग्रस्त कर चुके हैं. हाथियों के डर का आलम यह है कि प्रभावित गांवों में शाम ढलते ही सड़कें सुनसान हो जाती है. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं.

मशाल व पटाखों से खदेड़ा

हाथी के आने की खबर मिलते ही पूरा गांव जाग गया. ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए मशालें जलायीं और पटाखे छोड़कर हाथी को गांव की सीमा से बाहर खदेड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही हाथियों का झुंड रिहायशी इलाकों में धमक पड़ता है, जिससे जान-माल का लगातार नुकसान हो रहा है.

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Author: ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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