तूफान और तेज बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में बरपा कहर, सैकड़ों हुए बेघर, दहशत में रहे ग्रामीण, गुल रही बिजली
सरायकेला : 12 अक्तूबर की रात आयी तूफान से जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों में तबाही मच गयी. तूफान से कई घरों की खपरैल छतें उखड़ गयी, कई पेड़ और खंभे गिर गये. ऊपर से हुई जोरदार बारिश से कई कच्चे मकान ढह गये. बेघर हुए ग्रामीणों ने पास के स्कूलों व पंचायत भवन में शरण लेकर अपनी जान बचायी.
तूफान का सबसे अधिक असर जिला मुख्यालय से सटे पांड्रा व ईटाकुदर पंचायत पर पड़ा. पांड्रा पंचायत के हेंसा टोला पुंडीगुटु केंदपोशी, दोलानडीह के लगभग एक दर्जन घरों के खपरैल व एस्बेस्टस छत उखड़ गये, जबकि रात भर हुई भारी बारिश से भी दर्जनों घरों की दीवारें गिर गयी. वहीं ईटाकुदर पंचायत के रांगाडीह, बुंडु में भी एक दर्जन से अधिक मकानों को नुकसान हुआ है.
दूसरे दिन पांड्रा पंचायत के मुखिया गीता केराई ने दौरा कर प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया और मामले को जिला प्रशासन को अवगत कराया. मुखिया गीता केराई ने बताया अब तक कोई भी अधिकारी जायजा लेने नहीं पहुंचा है. राहत के नाम पर सिर्फ पीड़ित परिवारों को दस किलो अनाज दिया गया है.
12 और 13 अक्तूबर तक सरायकेला जिला फैलिन के प्रभाव में रहा. इन दो दिनों में आंधी और तेज बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी तबाही हुई. सबसे ज्याद बरबादी सरायकेला के पांड्रा व ईटाकुदर पंचायत, खरसावां के बुरुडीह एवं चांडिल डैम स्थल के आसपास के इलाकों में हुई है. यहां कई घरों के छत उड़ गये, तो कई घरों में पानी घूस गया. इसके अलावा दर्जनों पेड़ और बिजली के खंभे भी गिर गये, जिससे इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप रही.
इसके अलावा भारी बारिश से जिले की दो मुख्य नदिया संजय और खरकई उफान पर रहीं. जिससे खरसावां, कुचाई और राजनगर का संपर्क जिला मुख्यालय से 24 घंटे तक कटा रहा. इधर मंगलवार को चांडिल डैम के सभी 13 रेडियल गेट खोल दिये गये.
