सरायकेला वन प्रमंडल में हाथियों का बढ़ता आतंक, 25 वर्षों में 171 लोगों की गई जान

Saraikela News: सरायकेला वन प्रमंडल में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 25 वर्षों में हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के हमलों में 171 लोगों की मौत और 240 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश/हिमांशु गोप की रिपोर्ट

Saraikela News: झारखंड अलग राज्य गठन के बाद से ही सरायकेला वन प्रमंडल भी जंगली हाथियों से प्रभावित क्षेत्र रहा है. पिछले एक दशक से सरायकेला वन प्रमंडल का चांडिल वन क्षेत्र हाथियों के उत्पात का मुख्य केंद्र बना हुआ है. चांडिल वन क्षेत्र में वर्ष 2025 में दो लोगों की मौत हाथियों के हमले में हुई थी. 7 जून 2025 को नीमडीह के आंडा गांव की कुंती देवी और 9 दिसंबर 2025 को कुकड़ू के लेटेमदा गांव के गौरांग महतो की जान हाथियों ने ले ली थी. जबकि 2026 में कुकडू के सापारुम गांव के राधा तंतुबाई की मौत हाथी के कुचलने से हुई. आंकड़ों पर गौर करें तो सरायकेला वन प्रमंडल में पिछले 25 वर्षों में जंगली हाथी समेत अन्य जंगली जानवरों के हमले से 171 लोगों की मौत हुई है, जबकि 240 से अधिक लोग घायल हुए है. वर्ष 2004-05 में जंगली हाथियों ने सर्वाधिक 28 लोगों की कुचल कर जान ले ली थी. वर्ष 2011-12 में 12 और वर्ष 2012-13 और 2020-21 में 11-11 लोग हाथियों के शिकार हुए है. 

कुकड़ू के सापारुम में 6 और नीमडीह के आंडा में 16 हाथियों ने डला डेरा

सरायकेला वन प्रमंडल के चांडिल वन क्षेत्र पिछले कई वर्षों से जंगली हाथियों का उत्पात केंद्र रहा है. जबकि सरायकेला और खरसावां वन क्षेत्र में यदा कदा ही जंगली हाथी पहुंचते है. चांडिल वन क्षेत्र के गांवों में शाम होते ही हाथियों के चिंघाड़ सुनाई देती है. फिलहाल चांडिल वन क्षेत्र के कुकड़ू प्रखंड के सापारुम क्षेत्र में 6 और नीमडीह प्रखंड के आंडा गांव में 16 जंगली हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए हैं. 

शाम ढलते ही चांडिल में सुनाई दे रही है हाथियों की चिंघाड़

ये हाथी शाम होते ही गांवों में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं. आंडा क्षेत्र के हाथी दिन में चांडिल डैम के पानी में जलक्रीड़ा करते देखे जा रहे हैं. सापारुम बंगाल का सीमावर्ती गांव है. अपने फसलों को बचाने के लिए हाथों में मशाल लिए हाथियों के पिछे भागते लोगों वाला नजारा यहां अक्सर दिखाई देता है. खेत-खलिहान से हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिये विभाग की ओर से अब कोई ठोस पहल नहीं हुई है. 

एक हाथी भगाओ दस्ता के भरोसे वनविभाग 

चांडिल अनुमंडल के चांडिल, नीमडीह, कुकड़ू और ईचागढ़ प्रखंडों में पानला निवासी गयाराम महतो के नेतृत्व में हाथी भगाओ दस्ता सक्रिय है. वन विभाग की मदद से यह टीम लगातार हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर खदेड़ने का प्रयास कर रही है. परंतु अब तक सफलता नहीं मिली है. 

जंगली हाथियों से सर्वाधिक प्रभावित गांव

चांडिल प्रखंड के रसनिया, हथिनादा, नीमडीह के बाना, जामडीह, गुंडा, डीटांड़, वनघर, लावा, आंडा, सिरुम तथा कुकड़ू के कुकड़ू, रूपरु, बांदाबीर, सापारुम, केन्दांआदा समेत आस पास के  गांव हाथियों से सर्वाधिक प्रभावित हैं. 

क्या कहते हैं प्रभारी वनपाल ?

चांडिल वन क्षेत्र के अंडा, कल्याणपुर, ईचागढ़ आदि क्षेत्रों में जंगली हाथी कई क्षेत्रों में फैले हुए है. इस कारण हाथियों को खदेड़ने में परेशानी हो रही है. बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में हाथियों की मोनिटरिंग करना वनविभाग के लिए काफी मुश्किल हो रहा है. सुबह और शाम को हाथियों का व्यवहार काफी उग्र होता है. सावधानी बरतें, उस समय हाथियों को न छेड़ें. फोटो-वीड़ियो बनाने के लिये हाथियों के सामने न जाएं. हाथियों को गांव से जंगलों की ओर खदेड़ने के लिए प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए स्थायी रूप से एक दस्ता भी बनाया गया है. साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एक ओर दस्ता को बुलाया गया है. ग्रामीणों में पटाखा और चार्ट लाइट उपलब्ध कराया जा रहा है. यह जानकारी चांडिल के प्रभारी वनपाल मुकेश कुमार महतो ने दी. 

यौन अनुपात सही नहीं होने पर उत्पाती होते हैं जंगली हाथी

जानकार बताते हैं कि जंगली हाथियों के उत्पात मचाने के कई कारण होते है. बताया जाता है कि जंगल में भोजन की कमी होने और हाथियों को छेड़ने पर उत्पाती होते है. साथ ही जानकारों का मानना है कि हाथियों का यौन अनुपात सही नहीं होने के कारण भी हाथी उत्पाती हो जाते है. सरायकेला वन प्रमंडल में हाथियों का यौन अनुपात 1:8 के आस पास है. सरायकेला वन प्रमंडल में हाथियों का यौन अनुपात कुल मिला कर ठीक ठाक है. इस कारण हाथियों की संख्या में भी कमी नहीं आई हैं. 

फाइलों में दब कर रह गया हाथी कॉरिड़ोर को विकसित करने की योजना

चांडिल से लेकर ओडिशा बॉर्डर तक हाथी कॉरिडोर पर अवरोध के कारण ही हाथियों का उत्पात दिनों दिन बढ़ते जा रहा है. जंगली हाथियों के कॉरिडोर को विकसित करने की योजना भी फाइलों में उलझकर रह गई है. हाथी जंगलों में ही रहे, इसके लिए वन विभाग भी प्रयासरत है. वन विभाग की ओर से केंद्र सरकार की गज परियोजना के तहत वन क्षेत्रों में चेक डैम, तालाब आदी बनाकर जल स्रोत की व्यवस्था की गई है. 

सरायकेला वन प्रमंडल में विगत 22 वर्षों में जंगली हाथियों के कुचलने से मारे आए और घायल हुए लोग की संख्या – 

वित्तीय वर्ष : मारे गए लोग : घायल हुए लोग

  • 2004-05 : 28 मृत, 08 घायल
  • 2005-06 : 10 मृत, 14 घायल
  • 2006-07 : 06 मृत, 17 घायल
  • 2007-08 : 04 मृत, 06 घायल
  • 2008-09 : 04 मृत, 24 घायल
  • 2009-10 : 04 मृत, 03 घायल
  • 2010-11 : 03 मृत, 08 घायल
  • 2011-12 : 12 मृत, 10 घायल
  • 2012-13 : 11 मृत, 12 घायल
  • 2013-14 : 05 मृत, 09 घायल
  • 2014-15 : 07 मृत, 11 घायल
  • 2015-16 : 04 मृत, 05 घायल
  • 2016-17 : 05 मृत, 05 घायल
  • 2017-18 : 03 मृत, 15 घायल
  • 2018-19 : 06 मृत, 15 घायल
  • 2019-20 : 03 मृत, 15 घायल
  • 2020-21 : 11 मृत, 18 घायल
  • 2021-22 : 06 मृत, 08 घायल
  • 2022-23 : 07 मृत, 07 घायल
  • 2023-24 : 06 मृत, 06 घायल
  • 2024-25 : 01 मृत, 06 घायल
  • 2025-26 : 02 मृत, 12 घायल
  • 2026-27 : 01 मृत, 02 घायल

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By Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.

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