चाईबासा : इन दिनों हिंदी के सामने जैसी परेशानी आ रही हैं और जिस तरह से अंग्रेजी को अपनाया जा रहा है, डर है कि कहीं हिंदी गरीब तबके की भाषा तो बनकर नहीं रह जायेगी. इस विषय पर गंभीर विचार और चिंतन–मनन की जरूरत है.
यह बातें साहित्यकार रंजीत राजीव ने कही. वे शनिवार को हिंदी दिवस के अवसर पर वन विभाग के सभागार हिंदी विकास समिति की ओर से चर्चा का आयोजन किया गया. आयोजन की अध्यक्षता बृजेश कुमार शर्मा ने की. इस मौके पर शायर नूर हिंदुस्तानी ने वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों पर गजल पेश की.
इस मौके पर संस्था के कोषाध्यक्ष कौशल शर्मा, सचिव नरेश पासवान, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, अशोक नारायण वर्मा, मदन यादव, गोपाल सिंह आदि उपस्थित थे.
डीएवी में मना हिंदी दिवस
सूरजमल जैन डीएवी पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस मौके पर हिंदी विभागध्यक्ष एसबी सिंह ने कहा कि आजादी के 66 साल बाद भी हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी. कोर्ट–कचहरी और सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी को दूसरा दर्जा मिलता है.
देश के बड़े नेता भी हिंदी में पूछे गये सवाल का जवाब अग्रेंजी में देना अपनी शाम समझते हैं. हिंदी शिक्षक विश्वजीत सतपथी ने कहा कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. यह दस देशों में बोली और समझी जाती है.
डा. सरिता साव ने कहा कि हम मातृभाषा में ही अपनी भावनाओं को अच्छी तरह व्यक्त कर सकते हैं. मंच संचालन जेके पंडा ने किया तथा मौके पर शिक्षकों के साथ विद्यार्थी उपस्थित थे.
