प्रयोग के तौर पर पहली बार 14 हजार अनानस के पौधे लगाये गये थे
सरायकेला : सिरकारी योजनाएं तो बनती हैं परंतु अधिकांश योजनाएं सही मॉनीटरिंग के अभाव में सफल नहीं हो पाती. जिला में पहली बार प्रयोग की तौर पर की गयी अनानास की खेती की यही हाल है.
जिला कृषि कार्यालय परिसर में दो एकड़ भू–भाग पर की जा रही अनानास की खेती देखरेख के अभाव में बरबाद हो गयी है. खेत में उग आये घास से अनानास के पौधे मानो छिप गये हैं. स्थिति यह है कि पौधों के पत्ते हरे रंग के बजाय लाल हो गये हैं, जिससे विभाग के अनानास की खेती करने की योजना पर प्रश्न चिह्न् लग गया है.
गौरतलब है कि इस वर्ष जिला उद्यान विभाग की ओर से दो एकड़ पर अनानास की खेती करने की योजना थी. योजना के तहत कुल चौदह हजार अनानास के पौधे लगाये गये, जो अब बरबाद हो गये हैं.
अठारह माह में तैयार होता है अनानास
अनानास के पौधे कुल अठारह माह में तैयार होते है. पौधे मुख्यत: फरवरी माह में लगाये जाते हैं और यह सितंबर माह तक पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है, परंतु यहां बारह माह से अधिक हो गये हैं, बावजूद पौधों का विकास सही तरीके से नहीं हो पाया है. वैसे एक बीज से अनानास के तीन चार तक पौधे निकलते हैं. इसमें तो एक बीज में एक ही पौधे निकले हुए हैं वे भी सही तरीके से नहीं बढ़ सके.
